MP में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए बड़ा फैसला, पत्नी और माता-पिता को मिलेंगे 50-50 लाख रुपये
पुलिस स्मृति दिवस पर CM मोहन यादव की घोषणा, अगले दो साल में पुलिस विभाग के सभी 22,500 रिक्त पद भरने का भी ऐलान
भोपाल। RPKP INDIA NEWS। मध्य प्रदेश में ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता के बंटवारे में बदलाव की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस समारोह में कहा कि शहीद पुलिसकर्मी के परिवार को मिलने वाली एक करोड़ रुपये की सहायता राशि में से 50 लाख रुपये पत्नी और 50 लाख रुपये बुजुर्ग माता-पिता को दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह फैसला परिवार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। समारोह में पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करते हुए उनके परिवारों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया।
एक साल में 9 पुलिसकर्मी शहीद, आशीष शर्मा के बलिदान को किया याद
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच मध्य प्रदेश पुलिस के 9 अधिकारी-कर्मचारियों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण गंवाए। समारोह में इन सभी शहीदों के बलिदान को नमन किया गया।
डीजीपी ने नक्सल विरोधी अभियान में हॉक फोर्स के दिवंगत निरीक्षक आशीष शर्मा के योगदान को भी याद किया। उनके अनुसार, आशीष शर्मा ने बालाघाट के नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनाती के दौरान कई अभियानों में साहस और सूझबूझ का परिचय दिया था। उनके बलिदान के बाद नक्सल विरोधी अभियान को और तेज किया गया।
डीजीपी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान 110 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिए गए। दिवंगत निरीक्षक आशीष शर्मा के भाई को अनुकंपा नियुक्ति भी प्रदान की गई।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और शहीदों का योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश का नक्सलवाद की चुनौती से बाहर निकलना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इस अभियान में पुलिस जवानों के योगदान और उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने बताया कि राज्य में नक्सल विरोधी अभियान के तहत लगातार कार्रवाई की गई। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश 11 दिसंबर 2025 को नक्सल मुक्त राज्य बना। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में नक्सलवादी हमलों में 38 सुरक्षा जवानों और 58 नागरिकों की जान गई थी।
मुख्यमंत्री ने पुलिस बल को मजबूत करने के लिए भर्ती प्रक्रिया को गति देने की बात कही। उनके अनुसार, 18,500 पदों पर भर्ती का निर्णय लिया गया है और अगले दो वर्षों में पुलिस विभाग के सभी 22,500 रिक्त पदों को भरने का लक्ष्य है।
इसके अलावा, प्रदेश के प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की व्यवस्था विकसित करने के लिए अगले वर्ष 750 पदों पर भर्ती करने की भी घोषणा की गई।
साइबर अपराध और नशे के खिलाफ जागरूकता पर जोर
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कहा कि बदलते समय के साथ पुलिस के सामने साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और सोशल मीडिया से जुड़े अपराध जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इनसे निपटने के लिए तकनीक के उपयोग, पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण और जन-जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के लिए ‘नशे से दूरी है जरूरी’ और साइबर सुरक्षा के लिए ‘सेफ क्लिक’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं।
सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा के लिए तैयारियां
उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ-2028 को लेकर भी पुलिस प्रशासन तैयारियों में जुटा है। डीजीपी ने कहा कि इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए तकनीक आधारित सुरक्षा प्रबंधन और आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?
हर वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 जवानों की स्मृति से जुड़ा है।
इस अवसर पर देशभर में कर्तव्य निभाते हुए प्राण न्योछावर करने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित समारोह में भी शहीदों के बलिदान को याद किया गया और उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
