अष्टांग योग: एक प्राचीन विरासत

अष्टांग योग एक प्राचीन भारतीय विद्या है जो हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें आठ अंग हैं जो हमें मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

यम और नियम
अष्टांग योग के पहले दो अंग यम और नियम हैं। यम में पांच तत्व हैं – सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य। नियम में भी पांच तत्व हैं – शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान। ये दोनों अंग हमें एक नैतिक और आध्यात्मिक जीवन जीने के लिए आवश्यक तत्व सिखाते हैं।

आसन और प्राणायाम
अष्टांग योग के तीसरे और चौथे अंग आसन और प्राणायाम हैं। आसन हमें शरीर को लचीला बनाने और देर तक बैठने लायक बनाता है। प्राणायाम हमें सांसों पर नियंत्रण का अभ्यास करने में मदद करता है।

प्रत्याहार और धारणा
अष्टांग योग के पांचवें और छठे अंग प्रत्याहार और धारणा हैं। प्रत्याहार हमें यह समझने में मदद करता है कि हम जीने के लिए खाते हैं, न कि खाने के लिए जीते हैं। धारणा हमें आगे की खोज के लिए अस्ति और नास्ति के बीच चयन करने में मदद करती है।

ध्यान और समाधि
अष्टांग योग के सातवें और आठवें अंग ध्यान और समाधि हैं। ध्यान हमें किसी विषय वस्तु या शरीर के अंदर होने वाली हलचल को पहचानने में मदद करता है। समाधि वह अवस्था है जिसमें जीव अपने शिव स्वरूप के संपर्क में आकर शांति और आनंद से युक्त हो जाता है।

वर्तमान जीवन और मुक्ति का मार्ग
वर्तमान भोग प्रधान जीवन से संसार में अशांति फैल चुकी है। अष्टांग योग हमें मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद करता है और हमें एक शांत और आनंदमय जीवन जीने के लिए आवश्यक तत्व सिखाता है।

निष्कर्ष
अष्टांग योग एक प्राचीन विरासत है जो हमें शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व सिखाती है। आइए, हम अष्टांग योग को अपने जीवन में अपनाएं और इसके लाभों का अनुभव करें।

✍️ अरुण कुमार परोहा

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