खिरकिया एवं हरदा विकासखंड के ग्रामों का किया भ्रमण
कृषि विभाग के अधिकारियो एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिको की 04 डायग्नोस्टिक टीम द्वारा जिले में सघन क्षेत्र भ्रमण किया जा रहा है। इसी परिपेक्ष्य में आज खिरकिया विकासखण्ड के ग्राम हसनपुरा, डेडगांव, चौकड़ी, छीपाबड़ एवं हरदा विकासखण्ड के बरखेड़ा, मगरधा, झुण्डगांव एवं टिमरनी पानतलाई, दूधकच्छ, बरकला, चारखेड़ा, निमाचा, लछौरा, भवरास, करताना, राजाबरारी, कायदा, बोरपानी एवं कासरनी आदि गांवो में भ्रमण कर कृषको के खेतो का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कृषको के खेतो का निरीक्षण किया गया एवं कोविड 19 का पालन करते हुए ग्राम चौपाल कर कृषको को आंमत्रित कर कीट-व्याधि के रोकथाम के संबंध में जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिको द्वारा अवगत कराया गया कि, वर्तमान में सोयाबीन फसल पर तना मक्खी का प्रकोप देखने को मिल रहा है, इसके प्रकोप की पहचान के लिए तने को मध्य से चिरकर देखा जाता है, तब उसमें लारवा दिखाई देता है तथा लारवा की विश्टा दिखाई देती है। यह तना मक्खी जमीन से 1-2 इंच उपर तने में छेद करके अंडा देती है, अंडे से 4-5 दिन में लारवा निकलकर तने के मध्य भाग को बहुत तेजी से खाता है तथा पीछे विश्टा छोड़ते जाता है। इससे भूमि से पोषक तत्व एवं जल ले जाने वाली पाईपलाईन (ज़ायलम) एवं पत्तीयों द्वारा बनाये गये भोजन को जड़ो तक पहुचाने वाली पाईपलाईन (फ्लोएम) को क्षतिग्रस्त कर देता है। जिससे पत्तीया सुखने लगती है व पीली पड़ जाती है। इसी प्रकार फलियों का विकास अवरूद्ध हो जाता है। इस कीट के नियंत्रण के लिए लेम्डासायहेलोथ्रिन + थायमेथोक्जाम के कॉम्बिनेशन का 125 एम.एल. प्रति हेक्टयर अथवा बीटासायफ्लूथ्रिन 8.49 + इमिडाक्लोरोप्रिड 19.81 प्रतिशत ओ.डी. 350 एम.एल. प्रति हेक्टयर हाथ वाले पम्प से छिड़काव के लिए 500 लीटर पानी तथा पॉवर स्प्रेयर से छिड़काव के लिए 250 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति टंकी एक-दो चम्मच वाशिंग पाउडर जो कि, कीटनाशक को पत्ति पर चिपकाने का काम करेगा, को मिलाकर छिड़काव करें।