RTE भुगतान पर निजी स्कूलों का सरकार को अल्टीमेटम, 14 नवंबर से निकालेंगे ‘शिक्षा बचाओ रैली’
मध्य प्रदेश में करीब 550 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति राशि अब भी बकाया होने का स्कूल संचालकों का दावा, नर्मदापुरम से भोपाल तक पदयात्रा निकालने की चेतावनी
भोपाल | मध्य प्रदेश में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। निजी स्कूल संचालकों ने राज्य सरकार से बकाया भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। स्कूल संचालकों का दावा है कि पहले करीब 500 करोड़ रुपये जारी किए जाने के बावजूद अब भी लगभग 550 करोड़ रुपये की राशि लंबित है।
निजी स्कूल संचालक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शेष भुगतान जल्द नहीं किया गया, तो 14 नवंबर से नर्मदापुरम से भोपाल तक ‘शिक्षा बचाओ रैली’ के नाम से पदयात्रा निकाली जाएगी। संघ का कहना है कि इस आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों के निजी स्कूल संचालक शामिल हो सकते हैं।
500 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी भुगतान लंबित होने का दावा
निजी स्कूल संचालक संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, सरकार ने वर्ष 2023-24 की प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान पूरा कर दिया है। वहीं, वर्ष 2024-25 के भुगतान को लेकर लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था।
स्कूल संचालकों के प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से करीब 500 करोड़ रुपये जारी किए गए। संघ का कहना है कि अधिकांश स्कूलों को यह राशि मिल चुकी है, लेकिन इसके बाद भी लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है।
बकाया राशि से स्कूलों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि लंबित प्रतिपूर्ति राशि के कारण स्कूलों के नियमित संचालन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इस मामले को लेकर राज्यपाल, वल्लभ भवन और स्कूल शिक्षा मंत्री के समक्ष ज्ञापन देकर भुगतान की मांग की जा चुकी है।
संघ के मुताबिक, लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण स्कूलों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब सरकार पर बकाया राशि जारी करने के लिए दबाव बढ़ाया जा रहा है।
14 नवंबर से नर्मदापुरम से भोपाल तक पदयात्रा की तैयारी
निजी स्कूल संचालक संघ ने साफ किया है कि यदि सरकार जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो 14 नवंबर से ‘शिक्षा बचाओ रैली’ निकाली जाएगी। प्रस्तावित पदयात्रा नर्मदापुरम से शुरू होकर भोपाल तक पहुंचेगी।
संघ का दावा है कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालक हिस्सा ले सकते हैं। अब इस मामले में सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
