किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार मिलें खाद बीज एवं अन्य कृषि अनुदान: कृषि उत्पादन आयुक्त श्री गुप्ता
किसानों को फसलों की जल्दी बुवाई के लिए करें प्रेरित खरीफ वर्ष 2026 की समीक्षा और रबी 2026- 27 की तैयारी की बैठक भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की हुई समीक्षा
(भोपाल) कृषि उत्पादन आयुक्त श्री के सी गुप्ता ने कहा है कि रबी 2026- 27 के लिए प्रदेश के किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद, बीज एवं अन्य कृषि अनुदान सुगमता से प्राप्त हों. इसके लिए कृषि, सहकारिता और अन्य सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। प्रदेश में खाद बीज आदि की पर्याप्त उपलब्धता है, किसानों को फसलों के विविधीकरण, उर्वरक के संतुलित उपयोग, प्रमाणित बीजों के प्रयोग, नराली न जलाने और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए. इस वर्ष किसानों को फसलों की जल्दी बुवाई के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे वे वर्तमान में मिट्टी में उपलब्ध नमी का उपयोग कर सके।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री गुप्ता की अध्यक्षता में भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के लिए खरीफ वर्ष 2026 की समीक्षा और रबी 2026- 27 की तैयारियों सम्बन्धी बैठक शनिवार को अपेक्स बैंक के सभागार में संपन्न हुई. बैठक में आयुक्त भोपाल संभाग श्री कर्मवीर शर्मा, आयुक्त नर्मदापुरम संभाग, सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, आयुक्त सहकारिता, प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड, प्रबंध संचालक सहकारी विपणन संघ, सचिव पशुपालन एवं डेयरी, प्रबंध संचालक मत्स्य पालन, दोनों संभागों के सभी जिलों के कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थिति थे.बैठक के प्रारम्भ में संभागायुक्त भोपाल श्री कर्मवीर शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री गुप्ता ने कहा कि इस बार शासन द्वारा किसानों को खाद्य वितरण व्यवस्था को अत्यंत सुगम बनाया गया है। किसान घर बैठे ही खाद के लिए व्हाट्सएप से टोकन जनरेट कर सकते हैं. पंचायत स्तर पर फैसिलिटेशन सेंटर भी बनाए गए हैं। फसल बोने वाले प्रत्येक किसान को उसकी आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त खाद उपलब्ध कराया जाएगा।
श्री गुप्ता ने अधिकारियों को खाद्य वितरण पर विशेष ध्यान देने और इसकी माइक्रो प्लानिंग के निर्देश दिए. इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाए कि किसान को खाद्य प्राप्त करने के लिए दूर नहीं जाना पड़े। कृषि उत्पादन आयुक्त ने निर्देश दिए की नकली और अमानक खाद, बीज एवं कीटनाशक के विक्रय को सख़्ती से रोका जाए और ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, न केवल उनका लाइसेंस निरस्त किया जाए, अपितु उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए. कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी और उप संचालक कृषि ऐसे प्रकरणों में स्वतः संज्ञान लेकर तत्परता पूर्वक कार्रवाई करें। श्री गुप्ता ने निर्देश दिए कि नरवाई जलाने को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए, इसके लिए किसानों को समझाइश दी जाए तथा हार्वेस्टर के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाए। हर हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) लगा होना चाहिए, इससे नरवाई मिट्टी में मिल जाती है। किसानों को फसल बीमा योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाए जाने के लिए बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से बात करें। कृषि उत्पादन आयुक्त ने मंडियों को आधुनिक और किसानों के लिए सर्वसुविधा युक्त बनाए जाने पर भी जोर दिया।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव श्री निशांत बरबड़े ने बताया कि इस वर्ष अलनीनो की आशंका के मद्देनजर किसानों को फसलों की जल्दी बुवाई और कम पानी वाली फसलों गेहूं, अलसी, सरसों, मसूर, मटर आदि को लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, गुणवत्ता युक्त प्रमाणित बीजों और कृषि यंत्रों के प्रयोग के लिए भी कहा जा रहा है. जिन जिलों में प्रेशराइज्ड सिंचाई प्रणाली है वहां किसानों को ड्रिप स्प्रिंकलर लगाए जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बैठक मैं कृषि उत्पादन आयुक्त श्री गुप्ता ने निर्देश दिए कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाया जाए. इससे न केवल किसान समृद्ध होगा अपितु जीडीपी में भी वृद्धि होगी। वर्तमान में कृषि की तुलना में प्रदेश का उद्यानिकी रकबा काफी कम है. देश में यह प्रतिशत 16.5 है जबकि मध्य प्रदेश में 9.5 है. प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के विकास के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। श्री गुप्ता ने क्लस्टर आधारित उद्यानकी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक जिला 01-01 हज़ार एकड़ क्षेत्र का कम से कम 1-1 उद्यानिकी क्लस्टर बनाए, जिसमें उस जिले की विशिष्ट उद्यानिकी फसल लगाई जाए. इससे न केवल उस जिले की विशिष्ट पहचान बनेगी, अपितु किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मत्स्य पालन विभाग की समीक्षा के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने “मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्यउद्योग नीति-2026” के सुचारु एवं त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए. श्री गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध विशाल जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने, निजी निवेश को आकर्षित करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से यह नीति लागू की गई है। नीति के अंतर्गत केज कल्चर के साथ-साथ एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, ईको-टूरिज्म और ग्रीन एनर्जी जैसी एकीकृत गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 4.50 लाख से अधिक केज स्थापना के लिए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिससे लगभग ₹40,000 करोड़ के निजी निवेश तथा 3.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
बैठक में “प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना” के अंतर्गत ‘नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म’ (NFDP) पर मत्स्य पालकों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, जिसमें पंजीकृत प्रत्येक मत्स्य पालक को ₹100 की प्रोत्साहन राशि सीधे प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सुव्यवस्थित स्मार्ट फिश पार्लरों के संचालन, ‘फिश लैंडिंग सेंटर्स’ तथा अत्याधुनिक मत्स्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के शीघ्र निर्माण के निर्देश दिए। विभागीय समीक्षा करते हुए प्रबंध संचालक श्री अनुराग चौधरी ने समस्त जिला कलेक्टर्स एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत को योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन की निरंतर समीक्षा कर प्रगति सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा मत्स्य महासंघ के हलाली जलाशय एवं इंदिरा सागर जलाशय का चयन ‘रिजर्वायर फिशरीज क्लस्टर मॉडल’ के तहत संपूर्ण भारतवर्ष में मॉडल रिजर्वायर के रूप में किया गया है, जिसमें हलाली जलाशय को अग्रणी (Leading) स्थान प्राप्त हुआ है। मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की शत-प्रतिशत उपलब्धता तथा विभागीय जल क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही प्राथमिकता से करने पर जोर दिया गया, जिससे अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland Fisheries) में मध्य प्रदेश का प्रथम स्थान निरंतर बना रहे। इसी क्रम में, पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा बैठक में विभागीय सचिव डॉ. सुदाम खाड़े ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन का कार्य कृषि से भी अधिक समतामूलक (Equitable) है। मध्यप्रदेश निरंतर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर रहा है और यह आजीविका के साथ-साथ वैल्यू एडिशन का भी प्रमुख साधन है। बैठक में एपीसी श्री गुप्ता ने ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ तथा ‘ क्षीर धारा ग्राम योजना’ के तहत चयनित ग्रामों में सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण करने और ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ (राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम) की प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे पशुपालकों से सीधा संवाद कर उन्हें उन्नत पोषण, गर्भावधि (Gestation Period) देखभाल, ब्रीड इम्प्रूवमेंट तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं। साथ ही, दुग्ध सहकारी समितियों (DCS) एवं मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (MPO) को बढ़ावा देकर दूध संग्रहण बढ़ाने, सहकारिता के माध्यम से समय पर भुगतान सुनिश्चित करने तथा बेहतर सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान संभागायुक्तों एवं कलेक्टर्स को अंतर्गत गौ-शाला सहायता का समय पर सत्यापन व राशि वितरण, गौ-शाला प्रबंधन की मॉनिटरिंग तथा मनरेगा मद से स्वीकृत गौ-शालाओं को शीघ्र प्रारंभ एवं क्रियाशील करने के कड़े निर्देश दिए गए। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना तथा आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की समय-सीमा (TL) बैठकों में साप्ताहिक मॉनिटरिंग कर नए उद्यमियों को जोड़ने तथा आदान बैठकों में पशुपालन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, ‘गोपाल कृष्ण पुरस्कार’ का व्यापक प्रचार-प्रसार, ‘पशु कल्याण समिति’ की नियमित बैठकों से प्रस्तावों की स्वीकृति, करने के निर्देश दिए गए ।
दुग्ध संघ (MU) प्रबंधन के साथ संभागायुक्त की अध्यक्षता में नियमित बैठकें आयोजित करने, जिलेवार पशु चारा उत्पादन, प्रबंधन व परिवहन की मॉनिटरिंग करने तथा राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत हर ब्लॉक में साइलेज निर्माण को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। पशु मेलों को पुनर्जीवित व सुव्यवस्थित करने के साथ ही मैत्री कार्यकर्ताओं को राज्य स्तरीय कॉल सेंटर से जोड़कर कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं का सुदृढ़ीकरण करने तथा चलित पशु चिकित्सा इकाइयों द्वारा डोर-स्टेप डिलीवरी व क्रिटिकल इनपुट सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
