ब्रेकिंग न्यूज : एसीसी अधिकारी पर आरोप – बिना पैसा दिए नहीं होता ईपीएफ का काम
ईपीएफ निकालने के लिए दर-दर भटक रहे हैं ठेका श्रमिक
( कैमोर) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देश की जनता के कल्याण के लिए विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है और योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राही तक पहुंचाने के लिए कठोर कदम भी उठाए जा रहे हैं। जहां उनके इस कार्य से देशवासियों में खुशी एवं आशा का माहौल है वही कुछ विशेष लोगों के द्वारा उनकी योजनाओं को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। ठीक ऐसा ही एक मामला ए सी सी कैमोर सीमेंट वर्क्स कैमोर में देखने को मिल रहा है जहां ठेके में काम कर रहे श्रमिकों का शोषण करने में ठेकेदारों के द्वारा कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही और उसमें अप्रत्यक्ष रूप से कहीं ना कहीं एसीसी के अधिकारी भी चुप्पी धारण करते हुए सहयोग प्रदान करते नजर आ रहे हैं। मामला एसीसी में ठेके मे कार्यरत कर्मचारियों के ईपीएफ से संबंधित है जहां ठेकेदारों के द्वारा ईपीएफ का कार्य एक विशेष व्यक्ति से कराया जाता है जिससे श्रमिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि किसी व्यक्ति का पीएफ में नाम गलत है या जन्मतिथि गलत है या किसी की केवाईसी नहीं है इसका सुधार ठेकेदार के द्वारा किया जा सकता है लेकिन ठेकेदार किसी एक व्यक्ति को पीएफ का यह काम करने के लिए तय कर देते हैं जिससे उस आदमी को अपना काम उस एक व्यक्ति से ही करवाना पड़ता है जो मनचाहा पैसा लेता है। अगर वह व्यक्ति कहीं और से पीएफ निकलवाना चाहता है तो उसकी केवाईसी ही पूरी नहीं की जाती और अगर उसका नाम गलत होता है तो ज्वाइन डिक्लेरेशन फॉर्म में ठेकेदार के द्वारा दस्तखत नहीं किए जाते या उनकी केवाईसी ओके नहीं की जाती है। ज्ञात हो कि ईपीएफओ ने ऑनलाइन पीएफ निकालने की सुविधा लोगो को प्रदान की है लेकिन जो एक आदमी की समस्या बनी हुई है उस पर प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा है।

शासन को चाहिए कि ईपीएफ से संबंधित कार्य की समय सीमा निश्चित होना चाहिए। ठेकेदार को केवाईसी कितने दिन में ओके करना होगा और अगर ठेकेदार के द्वारा निर्धारित समय अवधि में कार्य नहीं किया जाता है तो उस पर क्या कार्यवाही होगी ? एसीसी कंपनी मे कार्यरत ठेकेदारों मे तो यह आम बात हो गई है। एक श्रमिक ने अपना नाम सार्वजनिक न किए जाने पर बताया है कि उसकी जन्मतिथि में सुधार किया जाना है , उसके पास जन्म प्रमाण होने के बावजूद भी एसीसी के संबंधित अधिकारी द्वारा जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। संबंधित अधिकारी का कहना है कि हम कर दिए हैं हमें बार-बार फोन ना लगाएं, जबकि दो माह बीत जाने के बाद अभी तक उसका काम नहीं हुआ है और वह व्यक्ति दर-दर भटक रहा है। एसीसी कंपनी के अधिकारी जो ईपीएफ का काम करते है उन्होने पीएफ का काम जैसे किसी का नाम गलत है या किसी का जन्मतिथि गलत है सुधारने के लिये एक व्यक्ति को उसका काम सौंप देते हैं और उसके द्वारा मनचाहा पैसों की मांग की जाती है। एक आम आदमी जब अपनी पसीने की कमाई जमा करता है और जब वह उसको निकालता है तो उसके आधे पैसे तो उसी में निकल जाते हैं। एसीसी के संबंधित अधिकारी को तो मात्र पैसों से ही मतलब होता है। अभी तक एसीसी के उस अधिकारी के द्वारा उस व्यक्ति का काम नहीं किया गया है। हद तो तब हो गई जब एक कर्मचारी के द्वारा यह कहा गया कि फ्री में समाजसेवा नहीं की जाती हर एक काम के पैसे लगते है ।यदि एसीसी प्रबंधन के द्वारा लिखित में यह आश्वासन दिया जाता है कि शिकायतकर्ता ठेकादारी श्रमिकों को ठेकेदार द्वारा काम से नही हटाया जाएगा तो शिकायत कर्ताओ को लंबी सूची सामने आएगी। एसीसी के डायरेक्टर प्लांट एवं एचआर हेड से अपेक्षा की जाती है कि ईपीएफ से संबंधित कार्य कर रहे संबंधित अधिकारी एवं ठेकेदारों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं जिससे किसी भी ठेका श्रमिक का शोषण ना हो सके और एसीसी प्लांट की छवि भी धूमिल ना हो।

