https://rpkpindianews.com/ पर्याप्त आवाज से डरकर टिड्डी ठहरती नहीं है

खरगौन :

गत दिनों राजस्थान के क्षेत्रों से होकर मप्र के नीमच व मंदसौर जिले में टिड्डी दलों के आगमन की सूचना प्राप्त हुई है। टिड्डी दल के प्रकोप की संभावना को ध्यान में रखते हुए कृषि उप संचालक एमएल चौहान ने बताया कि अभी हाल ही में टिड्डी दल देवास के विजय मंडी के भैसुनी व पटलावदा से होकर देवास से आगे हरदा जिले की दिशा से बागली के जंगलों की ओर है। इस दृष्टि से बड़वाह व काटकूट के किसानों को अलर्ट कर दिया गया है। इस टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए केंद्रीय नियंत्रण दल 10 वाहनों के साथ पिछे चल रहा है। साथ ही स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संबंधित क्षेत्र में अग्निशमन से पानी व दवाई का छिड़काव कर मारने व भगाने के प्रयास किए जा रहे है। खरगोन में भी समस्त ग्रामीण विस्तार अधिकारियों और कृषि अमले को सतर्क रहने के साथ-साथ किसानों को इस समस्या से अवगत कराते हुए बचाव के बारे में निर्देशित किया है।

एक दिन में करीब 150 किमी उड़ती है टिड्डी

कृषि उप संचालक श्री चौहान ने बताया कि टिड्डी दलों का आगमन प्रदेश में पहली बार नहीं है। पूर्व में खरगोन के अलावा अन्य क्षेत्रों में टिड्डी दलों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कृषि वैज्ञानिकों ने इस पर शोध करने के पश्चात एडवाईजरी जारी की है। यह टिड्डी दल जब जमीन पर रोशनी होने लगती है, तभी से पुनः उड़ना प्रारंभ करती है और जिस स्थान से शाम होती है, वहां गांव, फसलों, पेड़ों या अन्य ऊंचे स्थानों पर बैठती है। नियंत्रण के लिए प्रातः 4 बजे से उन स्थानों पर तेज पानी की बौछार व दवाईयों का छिड़काव किया जाता है। रासायनिक कीटनाशक जो टिड्डियों पर असरकारक होता है, उनमें क्लोरपाइरीफास, डेल्टामेथरीन, लेम्डासाईहेलोथीन, मेलाथियान दवाईयों का छिड़काव किया जाता है। वहीं जिस स्थान से गुजर रही होती है, अगर वहां पर्याप्त आवाज जैसे- ढ़ोल मांदल, डीजे, टेक्टर का साईलेंसर, घंटिया, खाली टीन के डिब्बे व थालियों से आवाज करने पर वे आगे की ओर निकल जाती है।

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