सरकार की मदद से श्रीमती रोशनी की प्रसव पीड़ा हुई आसान (कहानी सच्ची है)

( मुरैना )

जिला सागर के ग्राम पंचायत बगरोई निवासी श्रीमती रोशनी पत्नि पुष्पेन्द्र अहिरवार गुड़गांव हरियाणा से कोरोना महामारी के कारण पैदल ही घर की ओर चल निकले थे। रास्ते में राजस्थान धौलपुर से निकलते ही श्रीमती रोशनी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई इस दौरान रोशनी व उसके पति श्री पुष्पेन्द्र अहिरवार के दिमाग में डिलेवरी का कोई स्थान ज्ञात नहीं हो रहा था। ऐसी परिस्थिति में प्रदेश सरकार की पहल पर मुरैना कलेक्टर श्रीमती प्रियंका दास ने अल्लावेली बोर्डर से श्रीमती रोशनी व उसके परिवार को एंबूलेंस से जिला चिकित्सालय पहुंचाया। वहां श्रीमती रोशनी ने बेटे को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोंनो स्वस्थ्य है।
श्रीमती रोशनी पत्नि पुष्पेन्द्र अहिरवार ने बताया कि गुड़गांव हरियाणा में कारीगरी का कार्य करते थे। अचानक कोरोना महामारी के चलते देश व प्रदेश का आवागमन, रेल, बसों के पहिये 24 मार्च को रात्रि 12 बजे से थम गये थे। कोरोना वायरस लोंगो में न फैले इस दौरान सभी फैक्ट्रियां एवं मजदूरों के कार्य बंद कर दिये गये थे। श्रीमती रोशनी ने बताया कि जो भी पूंजी थी वह हमने घर बैठकर डेढ़ महीने में खत्म कर दी थी। अब खर्च के लिये पैसे नहीं थे। इधर में मेरे भी डिलेवरी का समय पूर्ण हो चुका था। रात दिन मैं और मेरे पति सोचते रहे कि आखिर प्रसव पीड़ा हुई तो इतना पैसा नहीं कि हम लोग जिला चिकित्सालय में डिलेवरी करा सकें। जब व्यक्ति पर पैसा नहीं होता है तब उसके दिमाग में तरह-तरह के ख्याल आने लगते है। ऐसे ख्याल हमारे मन में आ रहे थे। हम 12 को गुड़गांव से पूरे परिवार के साथ  पैदल सागर की ओर निकल पड़े। प्रसव का समय पूरा था, रास्ते में जिला धौलपुर के निकलते ही प्रसव पीड़ा शुरू हुई, अब तो मेरे और मेरे पति के हाथ पैर कांपने लगे तो मध्यप्रदेश शासन के अल्लावेली बॉर्डर पर जिला प्रशासन की ओर से सभी मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान तक भेजने के प्रबंध किये जा रहे थे। इस अवसर पर मेरी प्रसव पीड़ा देखकर मुरैना कलेक्टर श्रीमती प्रियंका दास ने जनपद सीईओ सुश्री सृष्टि भदौरिया के द्वारा एंबूलेंस मंगवाकर जिला चिकित्सालय भेजने के निर्देश दिये। जनपद सीईओ ने तत्काल एंबूलेंस बुलाई और मुझे जिला चिकित्सालय मे एडमिट कर दिया। कुछ समय बाद मैंने 15 मई को बेटे को जन्म दिया। जन्म देन के पश्चात् जिला चिकित्सालय मुरैना ने 17 मई को मुझे डिस्चार्ज कर दिया। मैंने मोबाइल पर जनपद सीईओ को सूचित किया। उन्होंने तत्काल एंबूलेंस के माध्यम से मुझे और मेरे परिवार को सागर बिना खर्चे के भिजवाया। जहां से हम अपने ग्राम बगरोई पहुंच गये है। अब जच्चा और बच्चा दोंनो स्वस्थ्य है। हम 14 दिन के लिये होम क्वारंटाइन का लाभ ले रहे है। तब श्रीमती रोशनी ने कहा कि शासन की मदद से मेरी प्रसव पीड़ा हुई आसान।

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