Secretaries Strike: ग्राम सचिवों की हड़ताल से कई विकास कार्य ठप पड़े! क्या अब सरकार मानेगी मांगें?

(जगदलपुर) मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़  दोनों राज्यों में साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं और विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों राज्यों में कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे हैं। जिससे चुनावी साल में सरकार शायद उनकी बातें सुनकर उनकी मांगें मान लें। छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां पर कई दिनों से सचिवों की हड़ताल है। इस हड़ताल का असर भी अब दिखने लगा है।

बता दें कि बस्तर जिले में ग्राम सचिवों की हड़ताल का असर अब ग्रामीण इलाकों में दिखने लगा है। बस्तर जिले सहित प्रदेश भर में शासकीयकरण की मांग करते हुए ग्राम पंचायत सचिवों की हड़ताल बीते 16 मार्च से जारी है। सचिवों की हड़ताल से जहां एक ओर शासन की विभिन्न विकास कार्य रुके हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ हड़ताल से ग्रामीण भी अब परेशान होने लगे हैं. जाति निवास सहित जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है। शासन की तरफ से सचिवों को हड़ताल खत्म करने का अल्टीमेटम भी दिया गया, लेकिन ग्राम पंचायत सचिव अपनी मांगों को लेकर हड़ताल से टस से मस होते नजर नहीं आ रहे हैं।

गांवों में कई विकास कार्य ठप हो रहे हैं

बस्तर जिले में 437 ग्राम पंचायतों में 411 सचिव पदस्थ हैं, कई जगहों पर एक ही ग्राम सचिव को दो-दो पंचायतों का प्रभार सौंपा गया है। गांवों में विभिन्न योजनाओं के कई विकास कार्य ठप हो रहे हैं। जहां इन कार्यों में पंचायत सचिवों की विशेष भूमिका रहती है। इससे निर्माण कार्य में काम कर रहे मजदूरों का मजदूरी भुगतान। मटेरियल का भुगतान सहित कई ऐसे वित्तीय मामले शामिल हैं। इस संबंध में पंचायत सचिव संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि परीक्षा अवधि के बाद शासकीय करण की मांग लंबे अरसे से की जाती रही है, लेकिन राज्य सरकार मांगों के प्रति गंभीर नजर नहीं आती है। ऐसे में हड़ताल करनी पड़ रही है, अब देखते हैं कि चुनावी साल में सचिवों की हड़ताल से काम पर पड़ रहे असर के बाद क्या सरकार इन सचिवों की मांगें पूरी करती है कि नहीं ?

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