सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान में एडवांस डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग पाठ्यक्रम का शुभारंभ

18 विद्यार्थियों के प्रथम बैच ने किया प्रवेश, कुलपति प्रो. डॉ. रामदास गोमाजी अत्रम ने किया नवीन कक्षा का उद्घाटन

(इन्दौर) सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD), क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार) एवं डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय (BRAUSS), महू के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) से मान्यता प्राप्त एक वर्षीय नियमित “एडवांस डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC)” के प्रथम बैच (सत्र 2026-27) का शुभारंभ गुरुवार को संस्थान परिसर, गोमटगिरि, गांधीनगर, इंदौर में गरिमामय वातावरण में हुआ। पाठ्यक्रम के प्रथम बैच में चयनित 18 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू के कुलपति प्रो. डॉ. रामदास गोमाजी अत्रम ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता (डीन), स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट डॉ. मनीषा सक्सेना तथा SPNIWCD की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रीता पटनायक विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के सहायक निदेशक श्री निलेश शिंदे ने किया।

विशेष आमंत्रित अतिथियों के रूप में पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. माया बोहरा, पोषण विशेषज्ञ डॉ. पूनम विशाल तथा ईसीसीई विशेषज्ञ (रॉकेट लर्निंग) सुश्री माधुरी उपस्थित रहीं। संस्थान के संकाय सदस्य एवं कर्मचारीगण भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के छायाचित्र पर माल्यार्पण , दीप प्रज्ज्वलन तथा राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रीता पटनायक ने कुलपति प्रो. (डॉ.) अत्रम एवं डॉ. मनीषा सक्सेना का स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

स्वागत उद्बोधन में डॉ. रीता पटनायक ने कहा कि बाल निर्देशन एवं परामर्श का क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। प्रत्येक विद्यार्थी को मानव मन की गहरी समझ के साथ उत्तरदायित्वपूर्ण एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा अपनी विशिष्टता के कारण विशेष होता है और केवल उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों पर ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता रखने वाले प्रत्येक बच्चे पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। सभी बच्चों को समान अवसर, प्रोत्साहन एवं सम्मान प्रदान करना ही एक संवेदनशील बाल मार्गदर्शक एवं परामर्शदाता का वास्तविक दायित्व है।

मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है, लेकिन विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बाल मनोवैज्ञानिकों एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी महसूस की जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम, व्यवहार संबंधी समस्याओं तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के कारण इस पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के वंचित एवं जरूरतमंद बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण एवं संवेदनशील सेवाएं पहुंचाने का संकल्प लें।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. डॉ. रामदास गोमाजी अत्रम ने विद्यार्थियों को अध्ययन के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि विद्यार्थी का सबसे बड़ा दायित्व निरंतर अध्ययन एवं ज्ञानार्जन है। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा और सीखने की इच्छा जितनी प्रबल होगी, व्यक्तित्व और ज्ञान का विकास उतना ही व्यापक होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से सतत अध्ययन, आत्मविकास एवं समाजोपयोगी कार्यों के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपना परिचय देते हुए इस पाठ्यक्रम से जुड़ने के उद्देश्य एवं अपनी अपेक्षाएं साझा कीं। बाल निर्देशन केंद्र के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने अपने हाथों से तैयार स्वागत कार्ड भेंट कर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का अभिनंदन किया। इस आत्मीय पहल की उपस्थित सभी अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने सराहना की।

कार्यक्रम के अंतर्गत कुलपति प्रो. डॉ. रामदास गोमाजी अत्रम ने फीता काटकर नवीन ADCGC कक्षा का विधिवत उद्घाटन किया। इसके पश्चात अतिथियों ने कक्षा का अवलोकन कर उपलब्ध कराई गई अधोसंरचनात्मक एवं शैक्षणिक सुविधाओं की सराहना की। इस अवसर पर अतिथियों एवं विद्यार्थियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, हरित परिसर और सतत विकास के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया।

अंत में संस्थान के सहायक निदेशक श्री निलेश शिंदे ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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