प्रदेश के स्कूलों में 8.66 लाख विद्यार्थियों का नामांकन घटा, शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल; सरकार कराए उच्चस्तरीय जांच: जीतू पटवारी
भोपाल। RPKP INDIA NEWS मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने प्रदेश के सरकारी एवं निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन में आई भारी गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
श्री पटवारी ने कहा कि प्रदेश में पहली से बारहवीं कक्षा तक विद्यार्थियों के नामांकन में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 8.66 लाख की कमी आना अत्यंत चिंताजनक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रदेश के स्कूलों में कुल 1,42,31,833 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज था, जबकि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 13 अक्टूबर तक यह संख्या घटकर 1,33,65,225 रह गई। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 8,66,608 विद्यार्थियों का अंतर सामने आया है, जो लगभग 6.1 प्रतिशत की गिरावट है।
उन्होंने कहा कि राजधानी भोपाल के स्कूलों में ही 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन कम होना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। मऊगंज, अलीराजपुर, अशोकनगर, शिवपुरी और गुना जैसे जिलों में भी नामांकन की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है।
श्री पटवारी ने कहा कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार और उनके उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के नामांकन में कमी आने के कारणों की अनदेखी नहीं की जा सकती। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का नामांकन क्यों घटा है? क्या बच्चे स्कूलों से दूर हो रहे हैं, क्या आर्थिक परिस्थितियां उनकी पढ़ाई में बाधा बन रही हैं, या फिर नामांकन एवं आंकड़ों के संकलन में कोई गंभीर समस्या है?
उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए, जिलेवार और स्कूलवार आंकड़ों का सत्यापन करे तथा नामांकन में गिरावट के वास्तविक कारणों को सार्वजनिक करे। साथ ही, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान कर उनकी शिक्षा दोबारा शुरू कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
श्री पटवारी ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा यह गंभीर विषय है। सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी या औपचारिक जवाब देने के बजाय जवाबदेही तय करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
