जनजातीय छात्रावास बनेंगे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण और प्रतिस्पर्धी तैयारी के केंद्र
छात्र हित सर्वोपरि, छात्रावासों में संसाधनों का उपयोग केवल विद्यार्थियों के लिए : कलेक्टर
कलेक्टर ने कहा कि कन्या छात्रावासों एवं कन्या आश्रमों की व्यवस्थाओं में विशेष सुधार लाया जाए तथा बालक एवं कन्या आश्रमों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को निर्धारित डाइट प्लान के अनुसार पौष्टिक, संतुलित एवं गुणवत्तायुक्त भोजन उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही सभी छात्रावास परिसरों में पोषण वाटिका विकसित करने के निर्देश दिए ताकि विद्यार्थियों को ताजी एवं पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो सकें।
बैठक में कलेक्टर ने विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें, गणवेश एवं अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग केवल छात्रावासों में ही किया जाए तथा उनके संरक्षण और पारदर्शी प्रबंधन को सुनिश्चित किया जाए। सभी छात्रावासों में पुस्तकालय व्यवस्था को सुव्यवस्थित एवं समृद्ध बनाने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अध्ययन की संस्कृति विकसित करने के लिए पुस्तकालयों को उपयोगी और आकर्षक बनाया जाए।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि छात्रावासों में आवश्यक खाद्य सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुओं एवं अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद प्राथमिकता के आधार पर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से की जाए। इससे स्थानीय महिला समूहों को रोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिलेगा, साथ ही गुणवत्तापूर्ण सामग्री की उपलब्धता और क्रय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
बैठक में विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए गए कि जिन बच्चों के पिता का जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध है, उनके जाति प्रमाणपत्र 30 जून तक अनिवार्य रूप से तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में केवल अनुमत एवं विद्यार्थियों के हित में होने वाली गतिविधियां ही संचालित की जाएं तथा अनुशासन और सुरक्षा संबंधी सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए।
कलेक्टर ने दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने हेतु उनका चिन्हांकन करने तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए प्रत्येक छात्रावास में स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाए।
छात्र हित में उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए एक समिति गठित किए जाने का निर्णय भी बैठक में लिया गया। यह समिति छात्रावासों में उपलब्ध धनराशि के बेहतर, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित उपयोग की रूपरेखा तैयार करेगी ताकि प्रत्येक संसाधन का लाभ सीधे विद्यार्थियों तक पहुंच सके।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि छात्रावासों के व्यवस्थित संचालन, अनुशासन एवं व्यवस्थाओं की सतत निगरानी के लिए प्रत्येक छात्रावास में एक समिति का गठन किया जाए, जिसमें वहां निवासरत छात्र-छात्राओं को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सहभागिता से व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही इससे उनके भीतर नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, टीम भावना तथा जिम्मेदारी के भाव का विकास होगा। छात्रावासों को विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास का केंद्र बनाने के लिए उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
प्रतिभावान छात्राओं को नीट और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की विशेष तैयारी कराई जाएगी
बैठक में कलेक्टर विकास मिश्रा ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा करते हुए कहा कि छात्रावासों में अध्ययनरत प्रतिभावान छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष अवसर प्रदान किए जाएंगे। दिसंबर माह में आयोजित चयन परीक्षा के माध्यम से 100 छात्राओं का चयन किया जाएगा, जिनमें 50 छात्राओं को नीट तथा 50 छात्राओं को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की विशेष कोचिंग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
कलेक्टर ने कहा कि जनजातीय छात्रावास केवल आवासीय सुविधाओं तक सीमित न रहें, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा, व्यक्तित्व विकास और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित हों। उन्होंने अधीक्षकों से अपेक्षा की कि वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाते हुए छात्रावासों में उत्कृष्ट शैक्षणिक, अनुशासित और प्रेरणादायी वातावरण सुनिश्चित करें, जिससे छात्र-छात्राएं शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
