पर्यावरण के लिये उपयेागी है गौशाला का वेस्ट

      कटनी जिले में अनुदान प्राप्त पंजीकृत गौशालाओं द्वारा अवशिष्ट पदार्था गोबर और गौमूत्र का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दिया जा रहा है। गौशालाओं के अवशिष्ट के रुप में गोबर और गौमूत्र प्रमुख रुप से उपलब्ध होता है। पंजीकृत गौशालायें गोबर का उपयोग कम्पोस्ट खाद बनाने के अलावा गोबर की लकड़ी, गमले आदि बनाने और गौमूत्र से आयुर्वेद औषधियां तथा विनायल बनाने के प्रयास कर रही हैं।

            कलेक्टर शशिभूषण सिंह द्वारा इन अनुदान प्राप्त गौशालाओं को सक्षम बनाने दयोदय पशु सेवा केन्द्र कैलवारा और नंद गोपाल गौशाला समिति ताली रोहनिया को गोबर से लकड़ी और गमला बनाने की मशीन खरीदने एक-एक लाख रुपये की अनुदान सहायता दी गई थी। जिससे मशीनों के द्वारा इन दोनों गौशालाओं में गोबर की लकड़ी और गमले आदि बनाने की काम भी शुरु कर दिया गया है। दयोदय पशु सेवा केन्द्र गौशाला के अध्यक्ष साकेत जैन ने बताया कि इस बार होली के लिये गोबर की लकड़ी की अधिक मांग होने पर गौशाला ने लकड़ी विक्रय कर मुनाफा कमाया। इसी तरह प्लास्टिक को हतोत्साहित करने गोबर के गमले ईको फ्रेन्डली होने के फलस्वरुप काफी पसंद किये जा रहे हैं। दयोदय पशु सेवा केन्द्र अब गौमूत्र से विनायल और आयुर्वेदिक औषधियां तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहा है।

   

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