लोकतंत्र तभी सशक्त है जब पक्ष और विपक्ष साथ मिलकर विकास और जनहित की सोचें

(भोपाल) मध्य प्रदेश अब नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण की दहलीज़ पर है। सत्तादल हो या विपक्ष, सब अपने प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभाएं और रैलियां कर रहे हैं। ऐसे में प्रत्याशियों की गलबघियां देखी जाना भले ही सामान्य हो, लेकिन मुख्यमंत्री जब विपक्ष के प्रतिद्वंदी से हाथ मिलाकर अभिवादन करे तो राजनीतिक गलियारों के उन शिशुओं के लिए सबक और बड़ी सीख है, जो चकमक कपड़ों के साथ सोशल मीडिया पर फ़ोटो पोस्ट करने को ही राजनीतिक रसूख मान बैठते हैं। राजनीतिक शिष्टाचार का “क, ख, ग, घ” पढ़े बगैर ही स्वयं को बड़ा नेता मान भाषाई मर्यादा तोड़ने में हिचक तक नहीं करते। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने गृहजिले के आष्टा शहर में चुनाव प्रचार के लिये आए। रास्ते में उन्होंने कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व नपा अध्यक्ष कैलाश परमार को देख अपना वाहन रुकवाकर अभिवादन स्वीकार किया। देखने में यह घटना सामान्य है, लेकिन मायने बड़े हैं। नई पीढ़ी राजनीतिक शिष्टाचार लगभग भूल बैठी है। उन्हें समझना चाहिए कि सोशल मीडिया पर बगैर सोचे – समझे भद्दी और अमर्यादित टिप्पणी न सिर्फ समाज बल्कि शहर की आबो- हवा को भी खराब करती है।

चुनाव केवल एक सामान्य प्रक्रिया है, अपने शहर, प्रदेश या देश के नेतृत्व को चुनने की। लोकतंत्र तभी सशक्त है जब पक्ष और विपक्ष साथ मिलकर विकास और जनहित की सोचें। असभ्य और बेलगाम होती नई पीढ़ी को अपने दलों की स्थापना की तारीख और उद्देश्य तक याद नहीं होंगे, उसके संविधान या संस्थापकों को जानने की बात तो दूर की कौड़ी है। चुनाव दो दिन बाद खत्म हो जाने हैं, फिर सबको साथ मिलकर रहना है। बस याद रहेगी तो वो बातें जो अतिउत्साह में इन दिनों खूब बोली जा रही हैं। उम्मीद है दोनों दलों के शैशव और उभरते युवा नेता अपने नेताओं के इस शिष्टाचार व्यवहार से सबक लेंगे!

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