भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी व कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति के मध्य चुनावी जंग

इंदौर लोकसभा क्षेत्र में 35 साल से भाजपा का जलवा: वर्ष 1962 में निर्दलीय प्रत्याशी होमी एफ.दाजी ने कांग्रेस को चुनाव हराकर बदल दिया था समीकरण,1989 से 2014 तक सुमित्रा महाजन रही सांसद

(छतरपुर) मध्यप्रदेश में कभी कांग्रेस का गढ़ रही इंदौर लोकसभा सीट पर बीते 35 सालों से भाजपा का कब्जा है। कांग्रेस ने इन सालों में कई प्रयोग किए। युवा से लेकर अनुभवी उम्मीदवारों को मौका दिया, लेकिन जीत नहीं मिली,
बता दें कि कांग्रेस को इंदौर सीट पर लगातार 9 बार हार मिली है। इस सीट से वरिष्ठ भाजपा नेत्री और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने रिकॉर्ड चुनाव जीते हैं। इंदौर लोकसभा सीट के इतिहास की बात करें तो पहले दो चुनावों में पूरे देश की तरह इंदौर में भी कांग्रेस का दबदबा रहा था। 1952 में कांग्रेस प्रत्याशी नंदलाल जोशी को जीत मिली। जबकि, 1957 में कांग्रेस प्रत्याशी खादीवाला कन्हैयालाल ने चुनाव जीता था। 1957 के चुनाव में कन्हैयालाल ने जनसंघ के किशोरीलाल को हराया था।

इंदौर के निर्दलीय सांसद होमी एफ.दाजी…
1962 के लोकसभा चुनाव में इंदौर सीट पर बड़ा उलटफेर हुआ। निर्दलीय प्रत्याशी होमी एफ.दाजी ने जीत हासिल की। चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के राम सिंह भाई करण सिंह को धूल चटाई थी। अब आप सोच रहे होंगे कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने वाले होमी एफ.दाजी कौन थे ? तो आपको बता दें कि होमी एफ. दाजी उस समय प्रदेश के जाने माने कम्युनिस्ट नेता थे । उन्होंने श्रमिकों और हाशिए पर रहने वालों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने 1952 में राजनीति में एंट्री की थी, 1957 में वे मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने और 1962 में इंदौर से लोकसभा के लिए चुने गए । लोकसभा चुनाव में उन्होंने राम सिंह भाई करण सिंह को मात दी थी। ये मुकाबला बहुत ही ज्यादा दिलचस्प था। होमी एफ.दाजी को 95,682 वोट मिले थे । जबकि, उनके प्रतिद्वंद्वी रामसिंहभाई ने 89,389 वोट हासिल किए थे। करीबी मुकाबले में दाजी ने बाजी मार ली थी।

कांग्रेस की आखिरी जीत और बीजेपी युग….
1989 का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत खास था क्योंकि यह इंदौर में उसकी पहली जीत थी. बता दें कि 1989 में बीजेपी ने पहली बार सुमित्रा महाजन को टिकट दिया था। जहां उनके सामने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी थे। सेठी इस सीट से सांसद थे। खास बात यह है कि इस चुनाव में बीजेपी नेत्री ने प्रकाशचंद्र सेठी को हराकर यह सीट कांग्रेस से छीन ली। जिसके बाद कांग्रेस की यहां कभी वापसी नहीं हुई ।
प्रकाशचंद्र सेठी की बात करें तो उनकी गिनती उस समय के कद्दावर नेताओं में होती थी। वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (1972-1975) और भारत के गृह मंत्री (1982-1984) रहे हैं। प्रकाश चंद सेठी चार बार इंदौर के सांसद भी रहे, उन्होंने 1967, 1971, 1980 और 1984 में जीत हासिल की। उन्होंने एच. दाजी (आईएनडी), सत्यभान सिंघल (जनसंघ), शील कुमार निगम (जेएनपी), और राजेंद्र नीलकंठ धारकर ( बीजेपी) को मात दी थी हालांकि, उनके सामने सुमित्रा महाजन ने शानदार जीत हासिल की। इस चुनाव में सुमित्रा महाजन ने एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। खास बात ये थी कि ये उनकी रिकॉर्ड जीत थी। उस समय यह पिछले सभी चुनावों में जीत का सबसे बड़ा अंतर था। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी और कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति के मध्य निर्णायक जंग होगी ।

इंदौर यानी सुमित्रा महाजन….
इसके बाद सुमित्रा महाजन की जीत का सिलसिला जारी रहा । उन्होंने 1991 में ललित जैन, 1996 में मधुकर वर्मा, 1998 में पंकज संघवी, 1999 में महेश जोशी और 2004 में रामेश्वर पटेल को हराया. हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में यह सीट फंस गई थी। इस चुनाव में महाजन ने यह सीट 11 हजार वोटों से जीती थी। जो उनकी सबसे कम वोटों के अंतर से जीत थी। इस चुनाव में महाजन को चुनौती देने वाले कांग्रेस उम्मीदवार सत्यनारायण पटेल थे। इसलिए 2014 में भी कांग्रेस ने उन्हें लगातार दूसरी बार अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन मोदी लहर और ताई के कॉम्बिनेशन सामने सत्यनारायण पटेल कहां टिक पाते। महाजन ने यह चुनाव 4 लाख 66 हजार वोटों से जीता था ।
2014 में लगातार 8 जीत के बाद ‘ताई’ के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया था । खास बात यह थी कि वह लोकसभा अध्यक्ष बनने वाली वो भारत की दूसरी और मध्य प्रदेश से पहली महिला थीं। वह 8 बार लोकसभा चुनाव जीतने वाली पहली महिला भी हैं। आपको बता दें कि सुमित्रा महाजन ने एक ही संसदीय सीट से लगातार 8 बार सांसद का चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बनाया था. देश में कोई भी उम्मीदवार एक सीट से लगातार चुनाव नहीं जीता है।

शंकर लालवानी ने भी बनाए रिकॉर्ड….
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सुमित्रा महाजन की जगह शंकर लालवानी को टिकट दिया। हालांकि, यहां पार्टी का उम्मीदवार बदला लेकिन बीजेपी ने फिर जीत हासिल की। शंकर लालवानी ने भी यहां रिकॉर्ड जीत हासिल की। आपको बता दें कि पिछले चुनाव में उन्होंने अब तक हुए सभी चुनावों में सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। वहीं ,पूरे मध्य प्रदेश की सभी सीटों पर उनकी जीत का अंतर सबसे ज्यादा था।

इंदौर इसलिए है बीजेपी का मजबूत गढ़…..
इंदौर सीट बीजेपी का बेहद मजबूत किला बन गई है । पार्टी यहां लगातार जीत रही है। गौर करने वाली बात यह भी है कि यहां पार्टी की जीत का अंतर भी शानदार रहता है। खास बात यह है कि नौ में से सात बार बीजेपी की जीत का अंतर एक लाख से ज्यादा और लगभग रहा है। बस 1998 और 2009 के चुनाव में बीजेपी की बढ़त 50 हजार से भी कम रही थी। वहीं, पिछले दोनों चुनावों में जीत का अंतर चार लाख से अधिक था।

इंदौर लोकसभा क्षेत्र से रहे सांसद…
1952 नंदलाल जोशी कांग्रेस, 1957 कन्हैयालाल खादीवाला कांग्रेस, 1962 होमी एफ. दाजी निर्दलीय, 1967 प्रकाश चंद्र सेठी कांग्रेस, 1971 प्रकाश चंद्र सेठी कांग्रेस, 1972 (उपचुनाव) राम सिंह भाई कांग्रेस, 1977 कल्याण जैन जनता पार्टी, 1980 प्रकाश चंद्र सेठी कांग्रेस, 1984 प्रकाश चंद्र सेठी कांग्रेस, 1989 से 2014 तक सुमित्रा महाजन बीजेपी से निर्वाचन रही, 2019 में शंकर लालवानी बीजेपी से जीते।

✍️ (पंकज पाराशर)
  RPKP INDIA NEWS
           छतरपुर

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें