आचार संहिता लागू होते ही तहसील दफ्तरों में सीमांकन कराने वालों की परेशानी बढ़ी
महीनों से लगे आवेदन पर अभी तक कार्रवाई नहीं
(हरदा) आगामी लोकसभा चुनावों के लिए आचार संहिता लागू होते ही तहसील दफ्तरों में सीमांकन कराने वालों की परेशानी बढ़ गई है। तहसील कार्यालय में डेढ़ सौ लोगों के जमीनों का काम पेंडिंग पड़ा है, लेकिन कुछ आरआइ-पटवारियों को फुर्सत नहीं मिल रही। पीड़ित जब फोन करते हैं तो उधर से जवाब मिलता है निर्वाचन कार्य में व्यस्त हैं जबकि अधिकारियों को कहना है कि निर्वाचन कार्य के अलावा हर सप्ताह होने वाली टीएल में सीमांकन की पेंडेंसी पर उनसे चर्चा होती है, इससे साफ होता है कि कुछ आरआइ पटवारी अफसरों को भी गुमराह कर रहे हैं।
ग्राम कड़ोला उबारी रेहटा खुर्द जमीन का सीमांकन कार्य पिछले छः महीने से पेंडिंग हैं। इस मामले में सीमांकन करने वाले आरआइ को जब भी फोन लगाओ तो वे अपने को चुनावी कार्य में व्यस्त रहने, कभी बाहर होने की बात कहकर फोन काट देते है।
कड़ोला उबारी निवासी किसान का कहना है कि उन्हें जमीन का नामांतरण कराना है, लेकिन पटवारी निर्वाचन की बात कहकर बाद में आवेदन देने की बात कह रहे हैं। इस मामले में एडीएम कुमार सानू का कहना है कि निर्वाचन के काम को लेकर अफसरों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सीमांकन के संबंध में टाइम लिमिट बैठक में समीक्षा की जाती है।
अब एसडीएम के यहां होगी अपील
दरअसल भू-राजस्व संहिता में बदलाव के बाद तहसीलदार के सीमांकन पर आपत्ति होने से एसडीएम के यहां अपील की जा सकेगी। इसके पहले अपील करने के लिए राजस्व मंडल जाना पड़ता था जिससे किसानों को महीनों चक्कर काटने पड़ते थे। अब एसडीएम के यहां अपील करने से जमीन का सीमांकन दोबारा से कराया जा सकेगा।
हरदा में रोजाना सीमांकन के पचास से अधिक आवेदन आते हैं। इसके लिए सादे कागज पर तहसील में जाकर आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद तहसीलदार जमीन मालिक सहित आसपास के किसानों को नोटिस जारी कर पटवारी मौके पर पहुंचकर जमीन का सीमांकन करते है परन्तु जिम्मेदार पटवारी आर आई अपनी जिम्मेदारियां से पहले लोकसभा चुनाव में अपनी व्यस्तता बताकर जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहते हैं। इससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।
✍️ (मुईन अख्तर खान)
RPKP INDIA NEWS
हरदा
