जिला जिला चिकित्सालय रतलाम में आगजनी से बचाव के लिए किया गया मॉकड्रिल

(रतलाम)  जिला चिकित्सालय के उन्नयन एवं गुणात्मक सेवा प्रदायगी हेतु सिविल सर्जन डॉ. एम.एस. सागर द्वारा लगातार 10 महीनों से ठोस सुधारात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया निरंतर जारी है। डॉ. सागर ने पदभार ग्रहण करने के 2 महीने के अंदर ही राष्ट्रीय स्तर का मानक “एनक्यूऐएस“ का निरीक्षण करवाया उसमें 88 प्रतिशत अंक हासिल कर देश में जिला चिकित्सालय रतलाम का गौरव बढ़ाया।इसी प्रकार नवजात एवं बच्चों की सेवाओं की  गुणवत्ता परखने के लिए राष्ट्रीय स्तर का मानक “मुस्कान कार्यक्रम “ कार्यक्रम निरीक्षण करवाया और मुस्कान में भी 88 प्रतिशत प्राप्त कर देश के मानक स्तर में बाल चिकित्सालय यूनिट की प्रतिष्ठा बढ़ाई है।

इसके बाद जिला चिकित्सालय की सेवाएं बढ़ाने के लिए एमबीबीएस के बाद चिकित्सकों के पीजी डिप्लोमा करने के लिए डीएनबीई कोर्स के लिए प्रयास किया गया उसमें भी सफलता हासिल कर 6 सीट “डीएनबीई“ की स्वीकृत करवाई है। निश्चित तौर पर यह किसी भी जिला चिकित्सालय के लिए बहुत ही सम्मान की बात है।इसी क्रम में गर्मी के मौसम को देखते हुए आगजनी की अप्रिय घटना से बचने के लिए शनिवार को सिविल सर्जन डॉ. सागर ने उपस्थित रहकर जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों, स्टाफ नर्सो, सफाई कर्मचारी, वार्ड बॉय एवं विभिन्न स्टाफ के समक्ष सबको आगजनी के समय किस प्रकार फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग किया जाए,की ट्रेनिंग दी गई। डॉ. सागर ने बताया कि अक्सर आगजनी के समय फायर फायर एक्सटिंग्विशर तो होते हैं परंतु उनको ऑपरेट करना नहीं आता, इसलिए यह मॉकड्रिल करके अस्पताल के प्रत्येक कर्मचारी को प्रत्यक्ष में ट्रेनिंग देकर बताया गया कि फायर एक्सटुइंशर किस प्रकार खोला जाता है तथा खोलने के बाद किस प्रकार उसका उपयोग किया जाता है, बताया गया।

अस्पताल प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं के सुधार हेतु अधिकारी एवं कर्मचारियों की बैठक लेकर कार्य आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर कार्य र्शली की मॉक ड्रिल कराई गई। अधिकारी, कर्मचारियों के सेक्शन में खुले तारों एवं स्पार्किंग वाले स्विचों, प्लग आदि को बदलवा दिया गया है। साफ सफाई के संबंध में कर्मचारियों को बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के संबंध में कार्य आधारित प्रशिक्षण दिया गया तथा निर्धारित प्रोटोकॉल अनुसार पूरे अस्पताल की साफ सफाई व्यवस्था को सुनिश्चित कराने संबंधी कार्यवाही की गई। एमसीएच अस्पताल में गर्भवती माताओं और प्रसूताओं को मिलने वाली सुविधाओं के संबंध में गुणात्मक सेवा प्रदायगी हेतु निर्देशित किया गया। एमरजेंसी सेवाओं के दौरान डयुटी रोस्टर का पालन करने एवं इस संबंध में निरीक्षण कर 24 गुणा 7 सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।गर्मी के मौसम के मददेनजर लू एवं तापाघात से पीडित रोगियों के लिए समस्त आवश्यक दवाईयों एवं चिकित्सकों की व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए ताकि आमजन को परेशानी ना हों। जिला चिकित्सालय के भर्ती वार्डों में मरीजों को आवश्यक परामर्श एवं चिकित्सा सेवाऐं संवेदनशीलतापूर्वक दिए जाने हेतु निर्देशित किया गया। अस्पताल प्रबंधन के संबंध में पूर्व में आयोजित बैठक में दिए निर्देशों का पालन प्रतिवेदन संबंधित प्रभारी अधिकारियों से प्राप्त कर व्यवस्थाओं के सुदृढीकरण हेतु निर्देश दिए गए। बैठक एवं मॉक ड्रिल के दौरान डॉ. महेश मौर्य, डॉ. चौहान, डॉ. रजत दुबे, डॉ. अंकिता सोनी, नर्सिग ऑफिसर्स एवं अन्य अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

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