कलेक्टर द्वारा वीसी के माध्यम से विभिन्न विभागों की समीक्षा 26 जून को

कटनी  शुक्रवार 26 जून को कलेक्टर शशिभूषण सिंह वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से विभिन्न विभागों के अधिकारियों से विभागीय गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। यह समीक्षा प्रातः 11 बजे से प्रारंभ होगी। जिसमें ब्लॉकस्तर से समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, सीईओ जनपद पंचायत, बीएमओ, सीडीपीओ उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही समस्त महिला एवं बाल विकास विभाग की समस्त सुपरवाईजर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं को भी आवश्यक निर्देश दिये जायेंगे। सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को ब्लॉकस्तर पर अनिवार्य रुप से वीसी में सम्मिलित होने के निर्देश दिये गये हैं।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान की समीक्षा शुक्रवार को

कटनी  गरीब कल्याण रोजगार अभियान की समीक्षा कलेक्टर शशिभूषण सिंह द्वारा 26 जून शुक्रवार को की जायेगी। यह समीक्षा बैठक अपरान्ह 4 बजे से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित होगी। जिसमें संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक जानकारी सहित उपस्थित रहने के लिये कहा गया है।

26 जून को मनाया जायेगा अर्न्तराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस

कटनी  उप संचालक सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण कटनी गौरव पुष्प ने बताया कि 26 जून को अर्न्तराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के रुप में बनाया जाता है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों, द्रव्यों तथा नशीली दवाओं एवं अन्य नशा सेवन की समाज में बढ़ रही प्रवृत्ति की रोकथाम एवं नशा सेवन से होने वाले दुष्परिणामों से युवाओं और छात्र-छात्राओं को जागरुक किया जाकर नशामुक्ति के प्रेरित करना है।

            वैश्विक महामारी कोविड-19 के दृष्टिगत शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत किसी प्रकार का आयोजन या समारोह किया जाना संभव नहीं है। साथ ही सभाओं आदि के आयोजन पर भी प्रतिबंध है। 26 जून को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के विरुद्ध अर्न्तराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के अवसर पर कार्यक्रम किये जाने के निर्देशों के अनुपालन में नोडल अधिकारी उच्च शिक्षा (तिलक महाविद्यालय कटनी), नोडल अधिकारी आईटीआई कटनी, प्राचार्य पॉलीटेक्निक महाविद्यालय कटनी, बारडोली जन कल्याण तथा विकास समिति कटनी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। जिसमें अर्न्तराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के अवसर पर नशामुक्ति, कोविड-19 विषयांतर्गत तात्कालिक भाषण, स्पीच प्रतियोगिता ऑनलाईन कराने के लिये कहा गया है। जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग, छात्र-छात्राओं का भी प्रतिनिधित्व हो सके।

आभासी कड़वा रोग से बचाव हेतु धान की बुवाई की शुरुआत बीजोपचार से करें – उप संचालक

कटनी  उप संचालक कृषि ए0के0 राठौर ने जिले के किसानों से धान की बोनी करते समय कड़वा रोग से बचाव के लिये बीजोपचारित करने की सलाह दी है। कृषि विभाग द्वारा दी गई सामयिक सलाह में कहा गया है कि कटनी जिले में गतवर्ष 172 हजार हैक्टेयर में धान की बोनी की गई थी। इस वर्ष 174.50 हजार हैक्टेयर धान की बोनी का लक्ष्य है। पिछले सप्ताह में कटनी जिले में खेत की तैयारी एवं बुवाई के लिये पर्याप्त नमी है। अतः किसान भाई खरीफ फसलों के लिये खेत तैयार कर बुवाई करें। धान का रोपा तैयार करने के लिये 1/10वां क्षेत्र नर्सरी के लिये उपयुक्त होता है। भूमि को कल्टीवेटर, हैरो के माध्यम से तैयार किया जाना चाहिये। भूमि की तैयारी के समय अच्छी तरह से विघटित एफवाईएम/कम्पोस्ट का उपयोग करें। समय पर बुवाई के लिये बेहतर किस्म के बीजों का चयन करें। किसान भाई गत वर्ष धान की फसल में आभासी कड़वा रोग का प्रकोप बहुतायत में देखा गया था। खासकर हायब्रिड धान में। अतः सभी से इस रोग की रोकथाम के लिये नर्सरी डालने से पहले बीजोपचार से शुरुआत करने के लिये कहा गया है।

            रोग प्रबंधन के लिये ट्राईसाईलेजॉल 75 प्रतिशत फफूंदनाशी को 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर धान को 8 घंटे के लिये डुबो कर रखें एवं उसके बाद ही नर्सरी में बोनी हेतु प्रयोग कर सकते हैं। इस रोग का प्राथमिक प्रकोप जब बाली निकलने लगती है और फूल के अवस्था में होती है तब होता है, इसके निदान के लिये बाली निकलते समय एवं जब बाली फूल की अवस्था में हों तब दो बार फफूंदनाशी में से कोई भी एक का चुनाव कर छिड़काव करने के लिये कहा गया है।

            यह रोग खरपतवार में भी जीवित रहता है इस कारण जब फफूंदनाशी फसलों में डाल रहे हों तो खरपतवार में भी जरुर डालें। धान की रोपाई अगर जल्दी कर दी जाये तो इस रोग की उग्रता कम होती है। अगर बाली निकलते समय रुक रुक कर वर्षा लगातार होती रहती है तो इस रोग के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। कम तापमान उच्च नमी इस रोग के प्रसार में अत्यंत सहायक होते हैं। इस रोग का प्रकोप होने पर नाईट्रोजन युक्त खाद का प्रयोग कम से कम करें।

            कृषि विभाग द्वारा संचालित योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना धान अन्तर्गत सूक्ष्म पोषक तत्व (माईक्रोन्यूट्रियन्ट), पौध संरक्षण औषधि (कीटनाशी एवं फफूंदनाशी), खरपतवारनाशी औषधि में कीमत का 50 प्रतिशत अधिकतम 500 रुपये प्रति हैक्टेयर प्रति कृषक 2 हैक्टेयर की सीमा तक डीबीटी के माध्यम से अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। इसके लिये कृषक क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से सम्पर्क कर अपना आवेदन पत्र में बैंक पासबुक, आधार कार्ड एवं भूमि संबंधी अभिलेख की छायाप्रति प्रस्तुत कर सकते हैं।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन धान एवं तिलहन योजना के लक्ष्य निर्धारित

कटनी  राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन धान एवं दलहन योजना में सूक्ष्म पोषक तत्व, पौध संरक्षण, रसायन, खरपतवार नाशक दवा के लक्ष्य विकासखण्डवार निर्धारित कर दिये गये हैं। उप संचालक कृषि ए0के0 राठौर ने बताया कि खरीफ वर्ष 2020 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन धान एवं दलहन अन्तर्गत सूक्ष्म पोषक तत्व, पौध संरक्षण रसायन, खरपतवार नाशक दवा, जिप्सम, जैव उर्वरक लाईम में अधिकतम 2 हैक्टेयर की सीमा तक कृषक अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। योजना अन्तर्गत विकासखण्डवार निर्धारित लक्ष्यों की सीमा तक प्रथम आओ-प्रथम पाओं के आधार पर किसानों को भुगतान डीबीटी माध्यम से खातों में किया जायेगा।

            किसानों द्वारा कृषि विभाग में आवेदन प्रस्तुत करने के बाद पंजीकृत संस्थाओं से उक्त सामग्री खरीदी जायेगी तथा कैश मेमो ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी इन्हें वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सत्यापित कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी के साथ देयक, बैंक पासबुक, आधार कार्ड की छायाप्रति के साथ उप संचालक कृषि को प्रस्तुत करेंगे।

            राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन धान में अनुदान की कीमत का 50 प्रतिशत अधिकतम 500 रुपये प्रति कृषक अधिकतम 2 हैक्टेयर की सीमा तक देय होगा। इसके लिये जिले में सूक्ष्म पोषक तत्वों का लक्ष्य 3 हजार हैक्टेयर, पौध संरक्षण रसायन का लक्ष्य 2200 हैक्टेयर और खरपतवार नाशक दवा का लक्ष्य 400 हैक्टेयर रखा गया है।

            राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन दलहन में सूक्ष्म पोषक तत्वों का लक्ष्य 1755 हैक्टेयर, पौध संरक्षण रसायन में 1635 हैक्टेयर, खरपतवार नाशक दवा में 335 हैक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।

            इसी प्रकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन दलहन में जिप्सम पर 750 रुपये प्रति हैक्टेयर का अनुदान है। इसमें 155 हैक्टेयर का लक्ष्य, लाईम अनुदान एक हजार रुपये प्रति हैक्टेयर का लक्ष्य 155 हैक्टेयर और जैव उर्वरक में 300 रुपये प्रति हैक्टेयर अनुदान है। इसमें 190 हैक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।

पशु संजीवनी योजना में पशुओं का घर पर ही इलाज

कटनी  मध्यप्रदेश शासन पशु चिकित्सा विभाग की पशु संजीवनी योजना के तहत पशु पालकों को उनके पशुओं की उपचार की आकस्मिकता होने पर घर पहुंच सेवा का लाभ दिया जा रहा है।

            उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ0 आर0के0 सिंह ने बताया कि इसके लिये पशुपालकों को राज्यस्तरीय कॉलसेन्टर के नंबर 1962 को डायल करना होगा। पशुपालकों द्वारा कॉल पर पशु की बीमारी के लक्षण एवं जानकारी बताये जाने पर पशु चिकित्सा विभाग की तकनीकी टीम मौके पर पहुंचेगी और पशु पालकों को घर पहुंच सेवा के तहत पशु उपचार, टीकारण, कृत्रिम गर्भाधन की सुविधा मुहैया करायेगी। इसके लिये कुछ सेवा शुल्क भी रखी गई है। जैसे उपचार के लिये शुल्क बड़े पशु गाय, भैंस, घोड़े, छोटे पशु भेंड, बकरी में 10 की संख्या तक 100 रुपये प्रति पशु, कुत्ता और कुक्कुट में भी 100 रुपये प्रति पशु लिया जायेगा। टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान शुल्क भी 100-100 रुपये प्रति पशु रखी गई है।

            उप संचालक पशु चिकित्सा ने बताया कि कटनी जिले के सभी विकासखण्डों में पशुधन संजीवनी योजना के तहत एक-एक चलित चिकित्सा वाहन उपलब्ध है।

कोरोना संक्रमण रोकने में मध्यप्रदेश अन्य प्रांतों की अपेक्षा ज्यादा सफल

मध्यप्रदेश की कोरोना ग्रोथ रेट मात्र 1.46 प्रतिशत

अब घर-घर स्वास्थ्य सर्वे की तैयारियां करें पूरी – मुख्यमंत्री श्री चौहान

कटनी – मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में एक जुलाई से डोर-टू-डोर स्वास्थ्य सर्वे के कार्य की जिलों में तैयारियाँ पूर्ण करें। सर्वे दल के गठन, उन्हें प्रशिक्षण और सर्वे कार्य के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाए। जिला कलेक्टर्स के साथ ही विभिन्न संभागों के लिए समीक्षा का दायित्व निभा रहे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सर्वे कार्य की तैयारियों को सुनिश्चित करें।

            मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय से वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश में कोरोना नियंत्रण की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। कान्फ्रेंस के दौरान बताया गया कि प्रदेश में कोरोना का ग्रोथ रेट 1.46 प्रतिशत है जो अन्य प्रांतों से सबसे कम है। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान उपस्थित थे।

            मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेस्टिंग की सुविधाओं में वृद्धि, उपचार के लिए बिस्तर क्षमता बढ़ाने, सोशल डिस्टेसिंग के पालन और फीवर क्लीनिक के संचालन से वायरस को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। प्रदेश में कोरोना ग्रोथ रेट को कम करने के प्रयास सफल हुए है, जिसका मतलब है कि संक्रमण रोकने में मध्यप्रदेश ज्यादा सफल रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि कान्टेक्ट हिस्ट्री पर नजर रखने का कार्य लगातार होना चाहिए और पॉजीटिव रोगियों की संख्या भी कम होकर शून्य तक आना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय गोयल को निर्देश दिए कि प्रदेश में रोगियों के स्वास्थ्य में पूर्ण सुधार हो और उन्हें रोग की गंभीर स्थिति से बचाने के  पूरे प्रयास हों।

            समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि प्रदेश में बुधवार को 6617 टेस्ट संपन्न हुए हैं। प्रदेश में उपलब्ध रोगी बिस्तर क्षमता का उपयोग भी  कम हो रहा है।  सामान्य बेड, आईसीयू बेड  पर्याप्त हैं, जिनका प्रबंध संक्रमण बढ़ने की आशंका को ध्यान में रखकर किया गया था। इन्दौर जिले में 16 प्रतिशत जनरल वार्ड और 30 प्रतिशत आईसीयू वार्ड का उपयोग हो रहा है। भोपाल में मात्र 15 प्रतिशत आईसीयू वार्ड भरे हुए हैं। इन्दौर और भोपाल जिलों को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में औसतन जनरल बेड 9 प्रतिशत और आईसीयू बेड 6 प्रतिशत ही उपयोग में लाये जा रहे हैं। कुल 76.4 प्रतिशत रिकवरी रेट के साथ मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। भारत के बड़े प्रांतों में एक्टिव केस संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश की स्थिति काफी ठीक हुई है। इस समय मध्यप्रदेश 2441 एक्टिव केस के साथ 13वें नंबर पर है। मध्यप्रदेश का पॉजीविटी रेट देश के पॉजीविटी रेट 6.26 से काफी कम 3.92 प्रतिशत है। प्रदेश का डब्लिंग रेट 47.7 दिवस है जो अन्य बड़े राज्यों में ज्यादा है। इसका अर्थ है कि प्रदेश में संक्रमण की रफ्तार को कम करने में ज्यादा सफलता मिली है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने धार और जबलपुर जिलों की पृथक समीक्षा की। कोन्फ्रेंस में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 47 जिलों में कम से कम एक एक्टिव केस और 23 जिलों में 10 से कम एक्टिव केस हैं। पांच जिलों में एक भी एक्टिव केस नहीं है। प्रदेश में अभी 1119 कन्टेनमेंट क्षेत्र हैं। इनमें 7.63 लाख आबादी निवासरत है। प्रदेश में  करीब 9 हजार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कोविड-19 में दायित्व निर्वहन किया जा रहा है।

गेहूं और चने के लिए किसानों को मिला 25 हजार 855 करोड़ का भुगतान

             प्रदेश में उपार्जित गेहूं और चने के लिए किसानों को राशि के भुगतान के कार्य की समीक्षा  भी मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की। प्रमुख सचिव खाद्य श्री शिव शेखर शुक्ला और प्रमुख सचिव कृषि श्री अजीत केसरी ने प्रदेश में उपार्जित गेहूं और चने के परिवहन और सुरक्षित भंडारण की जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उपार्जित गेहूं और चने की राशि के भुगतान की जानकारी भी प्राप्त की। बताया गया कि प्रदेश में गेहूं के लिए किसानों के खाते में 23 हजार 455 करोड़ और चने के लिए 2 हजार 400 करोड़ अर्थात कुल 25 हजार 855 करोड़  रुपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री स्वैच्छानुदान से तीन माह में 1801 लोगों को करीब 9 करोड़ की मदद

कटनी  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वैच्छानुदान मद से तीन माह में प्रदेश के 48 जिलों के 1801 जरूरतमंदों को 8 करोड़ 86 लाख 92 हजार 586 रुपये की सहायता की है। मुख्यमंत्री स्वैच्छानुदान निधि से स्वीकृत यह राशि संबंधितों के खाते में अंतरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना संकटकाल में प्राप्त आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही कराते हुए जरूरतमंदों को आर्थिक मदद पहुँचाई है।

इस अवधि में 1801 यानि प्रतिमाह 600 और प्रतिदिन 20 लोगों को स्वैच्छानुदान मद से आर्थिक मदद दी गई। इनमें आगर-मालवा जिले के 13 लोगों को 4 लाख 50 हजार, अनूपपुर में 3 को 2 लाख 50 हजार, अशोकनगर में 20 को 8 लाख 80 हजार, बड़वानी में 9 को 14 लाख 45 हजार, बालाघाट में 6 को एक लाख 90 हजार, बैतूल में 24 को 9 लाख 35 हजार, भिण्ड में 35 को 2 लाख 20 हजार, भोपाल में 435 को एक करोड़ 73 लाख, छतरपुर में 14 को 24 लाख 75 हजार, छिंदवाड़ा में 21 को 8 लाख 70 हजार, दमोह में 12 को 5 लाख 20 हजार, दतिया में 9 को 3 लाख 40 हजार, देवास में 61 को 31 लाख 50 हजार, धार में 15 को 9 लाख 85 हजार, गुना में 29 को 17 लाख 45 हजार, ग्वालियर में 32 को 22 लाख 35 हजार, हरदा में 32 को 16 लाख 65 हजार, होशंगाबाद में 89 को 35 लाख 75 हजार, इंदौर में 121 को 54 लाख, जबलपुर में 8 को 5 लाख 80 हजार, झाबुआ में एक को 50 हजार, कटनी में 5 को एक लाख 45 हजार की आर्थिक सहायता दी गई।

इसी प्रकार खण्डवा में 11 को 9 लाख 10 हजार, खरगोन में 12 को 6 लाख 70 हजार, मण्डला में 5 को 2 लाख 25 हजार, मंदसौर में 3 को 55 हजार, मुरैना में 28 को 8 लाख 25 हजार, नरसिंहपुर में 11 को 5 लाख 5 हजार, नीमच में एक को 5 हजार, पन्ना में 6 को 2 लाख, रायसेन में 103 को 35 लाख 76 हजार 111, राजगढ़ में 86 को 30 लाख 80 हजार, रतलाम में 12 को 8 लाख 85 हजार, रीवा में 91 को 37 लाख 5 हजार, सागर में 43 को 19 लाख, सतना में 19 को 9 लाख 65 हजार, सीहोर में 141 को 53 लाख 98 हजार, सिवनी में 5 को 2 लाख 55 हजार, शहडोल में 8 को 64 लाख 13 हजार 475, शाजापुर में 51 को 25 लाख 75 हजार, श्योपुर में 2 को एक लाख 50 हजार, शिवपुरी में 6 को 4 लाख 10 हजार, सीधी में 7 को 2 लाख 40 हजार, सिंगरौली में 3 को 2 लाख 15 हजार, टीकमगढ़ में 2 को 4 लाख 10 हजार, उज्जैन में 66 को 29 लाख 70 हजार, उमरिया में 2 को 26 लाख 50 हजार और विदिशा जिले के 83 व्यक्तियों को 40 लाख 95 हजार रुपये की सहायता शामिल है।

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