बगैहा–पिपरिया कला क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
(बरही) बगैहा, पिपरिया कला, खितौली एवं बरही क्षेत्र में संचालित धान खरीदी केंद्रों में भ्रष्टाचार का खेल खुलेआम जारी है। किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और इसका खामियाजा क्षेत्र के मध्यम एवं छोटे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

विगत दिनों कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा बरही एवं खितौली क्षेत्र के खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान वे पिपरिया कला के दो खरीदी केंद्रों तथा बगैहा खरीदी केंद्र पहुंचे। हालांकि निरीक्षण के दौरान किसी बड़ी अनियमितता का सामने न आना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि जमीनी हकीकत इससे इतर बताई जा रही है।

किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तौल प्रक्रिया के लिए उन्हें अवैध रूप से शुल्क देना पड़ता है। तौल कांटे तक की व्यवस्था किसानों को स्वयं करनी होती है। कई केंद्रों पर 20 से 30 रुपये प्रति क्विंटल तक की अवैध वसूली की जा रही है। वहीं बड़े किसानों एवं व्यापारियों को बिना किसी बाधा के तुलाई, बारदाने और मजदूर उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि मध्यम वर्गीय किसानों को बार-बार टाल दिया जाता है।

किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर उन्हीं का काम सुचारु रूप से होता है जो प्रभारी एवं उनके अधीनस्थों के निर्देशों का पालन करते हैं। नियमों की जानकारी रखने वाले किसानों से भी अवैध राशि वसूली जाती है, जबकि नियमों से अनजान किसानों से मनमाना पैसा लिया जाता है। कई किसानों को कड़ाके की ठंड में पूरी रात केंद्रों पर बैठे रहने को मजबूर होना पड़ता है।

गौरतलब है कि बगैहा, पिपरिया कला एवं खितौली क्षेत्र में कई खरीदी केंद्र महिला स्व-सहायता समूहों के नाम पर संचालित हैं। शासन का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार एवं अनुभव प्रदान करना है, लेकिन आरोप है कि वास्तव में इन केंद्रों का संचालन पुरुषों द्वारा किया जा रहा है। अधिकारियों के संभावित निरीक्षण की सूचना मिलने पर ही समूह की अध्यक्ष एवं सचिव को केंद्र पर बैठाया जाता है, निरीक्षण के बाद पुनः संचालन परिवार के अन्य सदस्यों या बाहरी व्यक्तियों के हाथों में चला जाता है।
किसानों का यह भी कहना है कि अधिकांश केंद्रों पर निजी कांटे उपयोग में लाए जा रहे हैं तथा 41 किलोग्राम से अधिक धान की तौल की जा रही है। इसके बावजूद संबंधित विभागीय अधिकारी एवं नोडल बनाए गए कर्मचारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
क्षेत्रीय किसानों ने जिला कलेक्टर एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि बिना पूर्व सूचना के जिला स्तरीय टीम द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे और पीड़ित किसानों को न्याय मिल सके।
✍️ नीरज तिवारी
पत्रकार, बरही

