जिले में टमाटर और मक्के के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के कार्यान्वयन संबंधी बैठक

कटनी (6 अगस्त)- कटनी जिले में टमाटर और मक्के का प्रचुर उत्पादन के दृष्टिगत स्वसहायता समूहों के माध्यम से सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण की इकाईयों को प्रोत्साहन दिया जायेगा। इसके साथ ही असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को कौशल ट्रेनिंग उद्यमशीलता प्रौद्योगिकी क्रेडिट एवं विपणन सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला के लिये सघन हैण्ड होल्डिंग एवं बेहतर आउटरीच के लिये सहायता प्रदान की जायेगी। इस आशय के निर्णय गुरुवार को कलेक्टर शशिभूषण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के कार्यान्वयन संबंधी बैठक में लिये गये। इस मौके पर महाप्रबंधक उद्योग अजय श्रीवास्तव, उप संचालक कृषि ए0के0 राठौर, उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ0 आर0के0 सिंह, डीएम नाबार्ड एम0 धनेश, परियोजना अधिकारी उद्यानिकी एस0बी0 सिंह भी उपस्थित थे।

            प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएम एफएमई) के कार्यान्वयन संबंधी जानकारी में बताया गया कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कटनी जिले में लगभग 1012 हैक्टेयर क्षेत्र में टमाटर 506 हैक्टेयर में आलू, 590 हैक्टेयर में प्याज, 300 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंघाड़ा, 60 हैक्टेयर में स्वीटकॉर्न मिलाकर हाईब्रिड और देशी मक्का लगभग 3 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में औसत रुप से फसल ली जाती है। इसके अलावा धान का मुख्य उत्पादक जिला होने से चावल के खाद्य प्रसंस्करण भी किये जा सकते हैं। चर्चा के दौरान एक जिला-एक उत्पाद के रुप में कटनी जिले में टमाटर के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों का बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा मक्के के उत्पादन के क्षेत्र में जिले की पहचान को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया।

            कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण की गतिविधियों से जुड़े आजीविका मिशन के महिला स्वसहायता समूहों को टमाटर कैचअप, पापड़, बड़ी, अचार निर्माण की इकाईयों को प्रोत्साहित करें। खाद्य प्रसंस्करण की दिशा में वातावरण तैयार कर स्वसहायता समूहों के उद्यानिकी विभाग और सूक्ष्म लघु उद्यम विभाग की योजनाओं के तहत प्रोजेक्ट तैयार कर स्वीकृत करायें। सूक्ष्म लघु उद्यम विभाग द्वारा इन योजनाओं के प्रोजेक्ट में 40 प्रतिशत और उद्यानिकी की योजनाओं में 35 प्रतिशत का अनुदान मिलता है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के क्रियान्वयन के लिये कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति भी गठित की जायेगी। समिति में महाप्रबंधक उद्योग, उप संचालक कृषि, परियोजना अधिकारी उद्यानिकी, एक ग्राम पंचायत के सरपंच, एक जनपद के सीईओ, एलडीएम, एफपीओ प्रतिनिधि, नाबार्ड के जिला प्रबंधक, एसआरएलएम के प्रबंधक और कलेक्टर द्वारा नामित किसी एक व्यक्ति को समिति में सदस्य बनाया जायेगा। जिला, क्षेत्र स्तर पर लाभार्थियों को हैण्ड होल्डिंग सहायता उपलब्ध कराने के लिये एसएनए द्वारा रिसोर्स पर्सन्स को भी नियुक्त किया जायेगा।

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