शासकीय छात्रावासों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू, इस वर्ष पूरी तरह ऑनलाइन होगी व्यवस्था

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30 मार्च तक ऑनलाइन करना होगा आवेदन
स्‍थान रिक्‍त होने वाले दूसरे चरण के लि‍ए 6 अप्रैल से 10 जून तक कर सकेंगे आवेदन

भोपाल | स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय छात्रावासों में वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार विभाग ने पूरी प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हुए इसे पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्यम से विशेष ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई है, जिससे छात्रावासों में प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा सके।

राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास में विशेष रूप से वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह पारदर्शी ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली शुरू की गई है। ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली एक समेकित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया, सीट आवंटन, अभिलेख संधारण और प्रशासनिक कार्यों को ऑनलाइन संचालित किया जाएगा।

30 मार्च तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

छात्रावासों में कक्षा 6 और अन्य कक्षाओं की रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए विद्यार्थी प्रथम चरण में 30 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यदि पहले चरण के बाद सीटें खाली रहती हैं तो दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें 6 अप्रैल से 10 जून 2026 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

प्रवेश के लिए अभिभावकों और विद्यार्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट Education Portal 3.0 पर जाकर आवेदन करना होगा। यह प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क सेंटर के माध्यम से भी पूरी की जा सकती है। यदि किसी अभिभावक या विद्यार्थी को आवेदन भरने में कठिनाई होती है, तो वे संबंधित छात्रावास के वार्डन की सहायता भी ले सकते हैं।

छात्रावासों में अलग-अलग सीट क्षमता

राज्य शिक्षा केंद्र के अनुसार विभिन्न छात्रावासों में लक्ष्य के अनुसार 50, 100, 150, 175, 200, 220 और 275 सीटों की व्यवस्था की गई है। कक्षा 6 से 8 तक की बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-I) और नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावासों में प्रवेश दिया जाता है, जबकि कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-III) में प्रवेश की पात्रता होती है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास की मार्गदर्शिका के अनुसार 75 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के लिए निर्धारित हैं। वहीं 25 प्रतिशत सीटें गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों की बालिकाओं के लिए आरक्षित रहती हैं। चयन में अस्थि बाधित, अनाथ और बेसहारा बालिकाओं को प्राथमिकता दी जाती है।

विशेष परिस्थितियों के बच्चों को भी मिलेगा अवसर

प्रदेश में संचालित 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावासों में कक्षा 3 से 8 तक के पात्र बालकों को प्रवेश दिया जाता है। इन छात्रावासों का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है जो किसी कारणवश स्कूल से दूर हो गए हैं। इसमें रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर रहने वाले बच्चे, पन्नी बीनने वाले, पलायन करने वाले परिवारों के बच्चे, घर से भटके हुए बच्चे, विमुक्त एवं प्रिमिटिव ट्राइबल परिवारों के बच्चे और वन ग्राम पट्टाधारी परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है।

प्रदेश में 597 छात्रावास संचालित

राज्य शिक्षा केंद्र के अंतर्गत प्रदेश में कुल 597 छात्रावास संचालित हैं। इनमें 207 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 324 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास और 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावास शामिल हैं। इन छात्रावासों में ऐसे बालक-बालिकाओं को आवासीय सुविधा प्रदान की जाती है जो शिक्षा से वंचित हैं या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते।

 

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