ईवीएम और मतगणना पर गंभीर सवाल, भोपाल दक्षिण-पश्चिम चुनाव मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन:पीसी शर्मा
(भोपाल) प्रदेश कांग्रेस कार्यालय ,भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण एवं चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं को लेकर पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया, अरुण श्रीवास्तव, जबलपुर हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर शर्मा,पार्षद गुड्डू चौहान, एवं विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता उपस्थित रहे।
पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी.सी. शर्मा ने 152-भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के चुनाव से जुड़े गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी सिविल (डायरी नं. 45048/2025) में दिनांक 23-03-2026 को पारित आदेश के तहत न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संज्ञान लिया है और नोटिस जारी किए हैं।
श्री शर्मा ने बताया कि नवंबर 2023 में सम्पन्न मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतर्गत 17 नवंबर 2023 को मतदान हुआ था, जिसमें वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी थे। 03 दिसंबर 2023 को हुई मतगणना में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को विजयी घोषित किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से प्राप्त मतों में उन्हें लगभग 25 प्रतिशत अधिक समर्थन मिला था, जबकि ईवीएम मशीनों की मतगणना में परिणाम पूरी तरह विपरीत दिखाई दिए। श्री शर्मा के अनुसार जिन ईवीएम मशीनों में बैटरी स्तर 99 प्रतिशत था, वहां भाजपा प्रत्याशी की जीत हुए, जबकि जिन मशीनों में बैटरी स्तर 60 से 70 उनमें कांग्रेस को बढ़त मिली।

श्री शर्मा ने यह भी कहा कि उनके पास स्ट्रांग रूम की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है, जिसमें ईवीएम मशीनों के साथ कथित छेड़छाड़ (टेम्परिंग) के संकेत मिलते हैं। उन्होंने चुनाव के बाद सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत गणना स्थल की सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तकनीकी जानकारी मांगी, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा इसे न्यायालय के आदेशों के अधीन बताते हुए उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसके अतिरिक्त, ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों में प्रयुक्त बैटरी की क्षमता और उपयोग से संबंधित जानकारी भी मांगी गई, जिसे निर्माता कंपनी द्वारा “अत्यधिक गोपनीय” बताते हुए देने से इंकार कर दिया गया।
श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की गोपनीयता और जानकारी छुपाना चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है और इससे निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है और इससे लोकतंत्र को गहरा आघात पहुंचा है।
अंत में श्री शर्मा ने कहा कि चूंकि मामला वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, उन्हें पूर्ण विश्वास है कि न्यायालय सत्य को सामने लाकर लोकतंत्र की रक्षा करेगा।
