कलेक्टर के निर्देश बेअसर: सिजहरा पंचायत में जेसीबी से टूटी पाइपलाइन, मड़वा टोला के आदिवासी बूंद-बूंद पानी को हुए मोहताज

ठेकेदार के द्वारा बनाई जा रही नाली निर्माण के नाम पर बनी परेशानी, ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन से न्याय कि लगाई जा रही गुहार

(कटनी)  जिले में विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विजयराघवगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सिजहरा के मड़वा टोला में चल रहे नाली निर्माण कार्य ने ग्रामीणों के लिए विकास की जगह संकट खड़ा कर दिया है। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान नल-जल योजना की पाइपलाइन को जेसीबी मशीन से क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिसके कारण लगभग दो महीनों से दर्जनों परिवार पेयजल संकट झेलने को मजबूर हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि विगत दिनों ही जिला कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे इसके बावजूद सिजहरा पंचायत में अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

पाइपलाइन तोड़ी, गांव को प्यासा छोड़ दिया
मड़वा टोला निवासी कंछेदीलाल कोल गीता बाई श्याम बाई समेत अन्य का कहना है कि निर्माण एजेंसी और संबंधित जिम्मेदार लोगों को पहले से पाइपलाइन की जानकारी दी गई थी, इसके बावजूद जेसीबी मशीन से लापरवाही पूर्वक खुदाई कर पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। परिणामस्वरूप मड़वा टोला के अनेक घरों में जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इस भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो आखिर प्रशासनिक निर्देशों का महत्व क्या रह गया है?

नाली निर्माण में खुलेआम मानकों की अनदेखी?
मामला केवल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। रेत और सीमेंट के अनुपात को कम रखा जा रहा है सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि जिस सरिए (रॉड) का उपयोग सामान्यतः भवनों के बीम और छल्लों के निर्माण में किया जाता है, उसी प्रकार की हल्की सामग्री नाली निर्माण में इस्तेमाल की जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए तो गुणवत्ता संबंधी कई गंभीर खामियां उजागर हो सकती हैं।

बरसात से पहले ही टूटने का खतरा
क्षेत्र में आगामी 10 से 15 दिनों के भीतर मानसून की दस्तक होने की संभावना है। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि यदि वर्तमान स्तर का निर्माण कार्य जारी रहा तो नाली पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही जल निकासी की समस्या विकराल रूप ले सकती है, जिससे गांव में जलभराव, कीचड़ और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा। उनका आरोप है कि जल्दबाजी और गुणवत्ता से समझौता कर केवल भुगतान निकालने की तैयारी की जा रही है।

एक ही ठेकेदार के कई पंचायतों में काम, जांच की उठी मांग
स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित ठेकेदार द्वारा सिजहरा ही नहीं बल्कि देवराखुर्द, उरदानी, पड़रिया, धबैया सहित विजयराघवगढ़ जनपद क्षेत्र की कई पंचायतों में निर्माण कार्य किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन कार्यों की भी स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, क्योंकि कई जगहों पर गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ना और कार्रवाई का अभाव कई तरह के संदेह पैदा कर रहा है।

जनपद कार्यालय की भूमिका पर उठे सवाल
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि संबंधित ठेकेदार को कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद जांच और कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
नल-जल योजना की क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कर जल आपूर्ति बहाल की जाए।
नाली निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच कराई जाए।
दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार, सरपंच, सचिव और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
पंचायत में पूर्व में हुए निर्माण कार्यों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
शिकायतों और जांच की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।

अब प्रशासन की साख दांव पर
सिजहरा पंचायत का यह मामला केवल एक नाली निर्माण या एक पाइपलाइन टूटने का नहीं, बल्कि सरकारी धन से हो रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और ग्रामीणों के मूलभूत अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कलेक्टर के आदेशों को जमीन पर उतारते हुए निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े कार्यों में गंभीर अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला माना जाएगा।

✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
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