स्वच्छ भारत मिशन पर गंदगी का तमाचा! शिव मंदिर के पीछे बह रहा दमदहा नाला बना गटर

सूर्य सनातन हनुमान मंदिर मार्ग पर पसरी गंदगी नगर परिषद की नाकामी का प्रतीक बना दमदहा नाला, दुर्गंध और प्रदूषण से त्रस्त नागरिक

(बरही) एक ओर देशभर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बरही नगर के दमदहा नाला स्थित शिव मंदिर के पीछे का क्षेत्र इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। कभी जल निकासी का माध्यम रहा यह नाला आज गंदगी, कचरे और दूषित पानी से भरकर गटर में तब्दील हो चुका है। नाले से उठती दुर्गंध और फैली गंदगी के कारण स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नाले की समुचित सफाई नहीं की गई है। नाले में प्लास्टिक कचरा, सड़ता हुआ जैविक अपशिष्ट और गंदा पानी जमा होने से स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। सूर्य सनातन हनुमान मंदिर मार्ग पर फैली गंदगी नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रही है।

आस्था के केंद्र के पीछे गंदगी का अंबार
शिव मंदिर और आसपास का क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन मंदिर के पीछे फैली गंदगी श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंचा रही है
पूजा-अर्चना के लिए आने वाले लोगों को दुर्गंध के बीच समय बिताना पड़ता है। विशेष अवसरों पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो जाती है।

बीमारियों का बढ़ता खतरा
गंदे पानी और कचरे के जमाव से मच्छरों तथा रोग फैलाने वाले जीवों के पनपने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों को डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संक्रामक बीमारियों का भय सताने लगा है। बरसात के मौसम में नाले का दूषित पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने से स्थिति और विकट हो सकती है।

नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल
नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है। कई बार शिकायतें और मांगें किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। सफाई के नाम पर कभी-कभार औपचारिक कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद नियमित सफाई, निगरानी और रखरखाव सुनिश्चित करे तो इस समस्या से आसानी से निजात मिल सकती है।

“स्वच्छ बरही, स्वस्थ बरही” अभियान पर उठे सवाल
नगर में समय-समय पर स्वच्छता अभियान चलाए जाते हैं, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और दीवारों पर स्वच्छता के नारे लिखे जाते हैं। लेकिन जब प्रमुख धार्मिक स्थल के पीछे का नाला ही गटर में तब्दील हो जाए तो ऐसे अभियानों की प्रभावशीलता पर सवाल उठना लाजिमी है।

नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता केवल नारों, पोस्टरों और विज्ञापनों से नहीं आती, बल्कि इसके लिए सतत और प्रभावी जमीनी कार्यवाही आवश्यक है।

जनता की प्रमुख मांगें
शिव मंदिर के पीछे स्थित दमदहा नाले की तत्काल सफाई कराई जाए।
नाले की नियमित सफाई और रखरखाव के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
दूषित जल निकासी की समस्या का तकनीकी एवं स्थायी समाधान किया जाए।
क्षेत्र में नियमित फॉगिंग और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए।
लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को विशेष स्वच्छता जोन घोषित किया जाए।

जनता पूछ रही है…
क्या स्वच्छ भारत मिशन केवल सरकारी फाइलों और विज्ञापनों तक सीमित रह जाएगा? क्या नगर परिषद दमदहा नाला स्थित शिव मंदिर के पीछे फैली गंदगी पर ठोस कार्रवाई करेगी? आखिर कब तक बरहीवासी दुर्गंध, प्रदूषण और अव्यवस्था के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेंगे?

बरही की जनता अब आश्वासनों और नारों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर साफ-सफाई और ठोस परिणाम देखना चाहती है। नगर परिषद के लिए यह समय केवल दावे करने का नहीं, बल्कि कार्रवाई करके दिखाने का है।

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