प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में सीधी देश में अव्वल

99.34 कम्पोजिट स्कोर के साथ देशभर में प्रथम स्थान, कृषि एवं ग्रामीण आजीविका के विभिन्न संकेतकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन

(सीधी) प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के परिणाम आधारित संकेतकों में सीधी जिले ने 99.34 कम्पोजिट स्कोर प्राप्त कर देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय, नियमित मॉनिटरिंग तथा किसानों की भागीदारी से जिले ने विभिन्न निर्धारित संकेतकों में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं।

कलेक्टर विकास मिश्रा के मार्गदर्शन में कृषि विकास को परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया गया। योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा और मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से फसल उत्पादकता, फसल विविधीकरण, दलहन एवं तिलहन के रकबे, उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती तथा श्री अन्न के उत्पादन को बढ़ावा मिला।

विभिन्न संकेतकों में उल्लेखनीय उपलब्धि

योजना के प्रमुख परिणाम आधारित संकेतकों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पिछले वर्ष की तुलना में फसल बीमा कवरेज में 28 प्रतिशत वृद्धि के लक्ष्य के विरुद्ध 28.13 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। इसी प्रकार बीमा से जुड़े किसानों की संख्या में 30 प्रतिशत लक्ष्य के विरुद्ध 31.97 प्रतिशत वृद्धि हुई। किसानों के स्वीकृत बीमा दावों के भुगतान में 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई तथा खरीफ और रबी दोनों मौसमों में निर्धारित लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति हुई।

किसान क्रेडिट कार्ड एवं प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के अंतर्गत भी जिले ने बेहतर प्रदर्शन किया। अल्पकालीन ऋण में पिछले वर्ष की तुलना में 6.78 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया गया। प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में 12.50 प्रतिशत लक्ष्य के विरुद्ध 11.55 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज हुई। किसान उत्पादक संगठनों के क्षेत्र में प्रति संगठन औसत सदस्य संख्या का 550 का लक्ष्य पार करते हुए 566 सदस्य दर्ज किए गए। वहीं औसत वार्षिक कारोबार के लिए निर्धारित 25 लाख रुपये के लक्ष्य की पूर्ति की गई।

प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत 1,000 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रमाणित प्राकृतिक खेती दर्ज की गई। इसके साथ ही श्री अन्न, दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देते हुए फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया गया।

कृषि के साथ ग्रामीण आजीविका एवं संबद्ध गतिविधियों में भी जिले ने निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति की। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों द्वारा 81.55 लाख रुपये का बैंक ऋण प्राप्त किया गया। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के अंतर्गत 48 व्यक्तियों का प्लेसमेंट, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से 490 व्यक्तियों का प्रशिक्षण तथा लक्षित ड्रोन दीदियों के अंतर्गत 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई।

इन उपलब्धियों में जिला प्रशासन के साथ कृषि एवं संबद्ध विभागों के समन्वित प्रयासों तथा किसानों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। योजनाओं को केवल लक्ष्य पूर्ति तक सीमित रखने के बजाय उनके परिणामों की निरंतर निगरानी की गई, जिससे कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति दर्ज हुई।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद योजना के अगले चरण में कृषि अधोसंरचना को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, भंडारण एवं प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

साथ ही शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए विभागवार कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित समीक्षा पर जोर रहेगा। कृषि उत्पादकता, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि तथा ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए जिले में कृषि विकास को और गति देने का लक्ष्य रखा गया है।

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