भगवान ही चला रहा है इंडिया को…….
खबर आई है कि म.प्र. के एक नगरीय निकाय में 11,000 रुपये का एक LED बल्ब और 33,000 रुपये लीटर वाला फिनाइल खरीदा गया है।
भगवान जाने सच क्या है ? पर अगर ये सच है तो ये भ्रष्टाचार नहीं,भ्रष्टाचार का महोत्सव है।
उसके बाद मैंने अपने चारों तरफ देखना शुरू किया तो लगा,वाकई ये देश भगवान भरोसे ही तो चल रहा है।
सड़कें टूटी हैं,पर गाड़ियाँ दौड़ रही हैं,
स्कूल- कॉलेज जर्जर हैं,पर बच्चे पढ़ रहे हैं,दवा मेडिकल पर नहीं किराने की दुकान पर मिल रही है,इलाज डॉक्टर नहीं कंपाउंडर कर रहा है,नेता जनता की सेवा नहीं अपनी सात पुश्तों की दौलत बना रहे हैं,पत्रकार पत्रकारिता को छोड़कर बाकी सारे धंधे कर रहा है,चुनाव आयोग चुनाव करा नहीं रहा जनसंख्या गिन रहा है और न्याय की देवी की पट्टी अब आँखों से हटकर सत्ता की आँखों पर बंध गई है।
इतनी सारी संस्थाएँ जब अपनी जिम्मेदारी से थक कर बैठ गई हैं,
और फिर भी देश चल रहा है, तो मान लीजिए…………।
संविधान से नहीं, सिस्टम से नहीं ये देश सिर्फ भगवान भरोसे चल रहा है…।
