निराला जी और कलाम साहब को किया नमन –

( बड़वानी )

शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा आज प्राचार्य डॉ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्शन में सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की 59 वीं पूण्यतिथि और डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की 89 वीं जयंती के अवसर पर उन्हें याद किया। कोविड-19 के प्रोटोकाल का अनुसरण करते हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन उनके योगदान की चर्चा की। पुस्तकालय विशेषज्ञ प्रीति गुलवानिया, राहुल मालवीया, ग्यानारायण शमा और डॉ.मधुसूदन चौबे (एम.ए. हिन्दी साहित्य) ने बताया कि 1896 में निराला जी का जन्म और 1961 में  देहावसान हुआ था। उन्होंने काव्य, उपन्यास, कहानी, नाटक, आलोचना आदि लिखे तथा अनुवाद कार्य भी किया। वे समकालीन पत्रिकाओं के यषस्वी संपादक भी रहे। उनकी अनेक रचनाओं में अनामिका, गीतिका, परिमल, कुकुरमुत्ता, तुलसीदास, चतुरी चमार, सखी, अल्का, कुल्ली भाट, शकुन्तला, राणाप्रताप, अपरा, राम की शक्ति पूजा’, ‘सरोज स्मृति’ जूही की कली, तोड़ती पत्थर आदि उनकी प्रमुख रचनाएं हैं। डॉ कलाम ने 15 अक्टूबर, 1931 से 27 जुलाई, 2015 तक के लगभग चौरासी वर्ष के जीवन में अनुकरणीय उपलब्धियां हासिल कीं।  हॉकर के रूप में अपनी जिंदगी शुरु करने वाले कलाम साहब अपनी प्रतिभा तथा परिश्रम के बल पर देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद पर पहुंचे।

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