ब्रेकिंग न्यूज़ : विन्ध्य प्रदेश का झंडा ‘लांच’ करने के बाद बोले नारायण त्रिपाठी – बनकर रहेगा पृथक विन्ध्यप्रदेश
( सतना ) बीजेपी के मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने विन्ध्य प्रदेश के नाम से एक झंडा और एक लोगो लांच किया है। वे लगातार पृथक प्रदेश की मांग कर रहे हैं। लंबे समय से विन्ध्य प्रदेश की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने अब एक नया कदम उठाया है। नारायण त्रिपाठी ने विन्ध्य का झंडा ओर लोगो लांच किया है। उनके इस अप्रत्याशित कदम के बाद एक बार फिर प्रदेश की सियासत गरमा सकती है।
विन्ध्य के झंडे का किया लोकार्पण
दरअसल, बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी अपनी सरकार के खिलाफ जाकर लंबे समय से पृथक विन्ध्य की मांग कर रहे हैं। अब उन्होंने विन्ध्य के एक झंडे का लोकार्पण किया है। उन्होंने कहा कि हर विन्ध्यवासी चाहता है कि फिर से विन्ध्य प्रदेश बने। इसलिए अब पृथक विन्ध्य प्रदेश की मांग का अभियान और तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी की मांग
विधायक नारायण त्रिपाठी ने विन्ध्य क्षेत्र का विकास न होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पृथक विंध्य प्रदेश बनाने की मांग की है। नारायण त्रिपाठी ने कहा कि विन्ध्य क्षेत्र में अस्पताल नहीं, कॉलेज नहीं, रोजगार नहीं है। विंध्य का विकास भी नहीं हुआ है। इसलिए अब सभी की जन भावना को स्वीकार करना होगा। क्योंकि विन्ध्य की जनता चाहती है कि अब पृथक विन्ध्य प्रदेश बना दिया जाए।
2023-24 में विन्ध्य होगा पृथक प्रदेश
विधायक नारायण त्रिपाठी ने कहा कि 2023-24 में विन्ध्य पृथक प्रदेश होगा, ऐसा उनका विश्वास है क्योंकि क्षेत्र की जनता अलग विन्ध्य चाहती है। नारायण त्रिपाठी ने विन्ध्य का जो झंडा लांच किया है, उसमें दतिया, ओरछा, छतरपुर, बिजावर, पन्ना, अजयगढ़, नागौद, बरौंधा, मैहर और रीवा का हिस्सा जोड़ा हुआ बताया है। इसके अलावा जो ‘लोगो’ उन्होंने लांच किया है उस पर लिखा है कि ‘विन्ध्य प्रदेश, समृद्ध प्रदेश’। नारायण त्रिपाठी ने कहा कि विन्ध्य का एक-एक वासी अब अपना पृथक विंध्य प्रदेश चाहता है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी के सपने को कर रहा हूं साकार
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी छोटे-छोटे राज्यों को बनाने के पक्षधर थे। वह पृथक प्रदेश बनाए जाने के भी पक्षधर थे। इसलिए वह तो अटलजी के सपने को साकार कर रहे हैं। वहीं बीजेपी से समर्थन नहीं मिलने पर उन्होंने कहा कि यह उनकी निजी राय है। विधायक ने कहा कि हर स्तर पर विन्ध्य को पृथक प्रदेश बनाने के लिए काम होगा। इसके लिए लगातार काम भी किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लिख चुके हैं पत्र
नारायण त्रिपाठी पृथक विन्ध्य प्रदेश की मांग को लेकर पीएम मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि विन्ध्य प्रदेश का पहले अलग अस्तित्व था। लेकिन मध्यप्रदेश के गठन के बाद उसका विलय इसी राज्य में कर दिया गया। उन्होंने इसका विपरीत प्रभाव बताते हुए लिखा है कि विन्ध्य क्षेत्र का विकास काफी समय से ठप पड़ चुका है। मैहर विधायक ने पीएम को लिखा है कि विन्ध्य क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, प्रशासनिक सुदृढ़ता और मजबूत कानून व्यवस्था के लिए यह बेहद जरूरी है कि यह मध्यप्रदेश से पृथक होकर एक स्वतंत्र राज्य बने।
लंबे समय से चल रही है विन्ध्य प्रदेश की मांग
दरअसल, 1956 में मध्यप्रदेश के गठन के बाद से ही पृथक विन्ध्य प्रदेश बनाए जाने की मांग चल रही है। मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी भी पृथक विन्ध्य प्रदेश बनाए जाने के पक्षधर थे। श्री तिवारी ने विन्ध्य प्रदेश की मांग को लेकर विधानसभा में एक राजनीतिक प्रस्ताव भी रखा था, जिसमें उन्होने कहा था कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विन्ध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र को मिलाकर पृथक प्रदेश बनाया जाए। हालांकि इस मुद्दे पर ज्यादा विचार नहीं हुआ, लेकिन विधानसभा में प्रस्ताव आने के बाद गाहे-बगाहे कई नेता पृथक विन्ध्य प्रदेश बनाए जाने की मांग समय-समय पर उठाते रहते हैं। कई बार विन्ध्य प्रदेश को लेकर छोटे-मोटे आंदोलन भी हुए हैं।
कितना बड़ा है मध्यप्रदेश का विन्ध्य अंचल
रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, उमरिया और शहडोल जिले विन्ध्य अंचल में आते हैं। जबकि कटनी जिले का कुछ हिस्सा भी विन्ध्य क्षेत्र का माना जाता है। इसके अलावा यूपी के कई जिले भी विन्ध्य क्षेत्र का हिस्सा माने जाते हैं। मध्यप्रदेश के गठन से पहले विन्ध्य पृथक प्रदेश था, जिसकी राजधानी रीवा थी। आजादी के बाद सेंट्रल इंडिया एंजेसी ने पूर्वी भाग की रियासतों को मिलाकर 1948 में विन्ध्य राज्य का गठन किया था। विन्ध्य क्षेत्र पारंपरिक रूप से विंध्याचल पर्वत के आसपास का पठारी भाग माना जाता है। एक ऐसा प्रदेश जो प्राकृतिक और ऐतिहासिक संपदाओं से परिपूर्ण था। इतना ही नहीं विन्ध्य प्रदेश में 1952 में पहली बार विधानसभा का गठन भी किया गया था। विन्ध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित शंभुनाथ शुक्ला रहे, जो शहडोल के रहने वाले थे। वर्तमान में जिस इमारत में रीवा नगर-निगम संचालित किया जाता है, वह इमारत उस वक्त विन्ध्य प्रदेश की विधानसभा थी। विन्ध्य प्रदेश करीब चार साल तक अस्तित्व में रहा, लेकिन 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश के गठन के साथ ही विन्ध्य प्रदेश को भी मध्य प्रदेश में मिला दिया गया।
रिपोर्ट : कृष्ण कुमार त्रिपाठी सतना
