कोरोना योद्धाओं का करें सम्मान, जन प्रतिनिधियों को घेरें

खरी – अखरी

(कटनी) अस्पताल में स्टॉफ की कमी है । डॉक्टरों, की कमी है । चिकित्सा सुविधाओं की कमी है । जगह की कमी है । इन सबके बाद भी जो संभव हो पा रहा है । उसे करने के लिए डॉक्टर, स्टॉफ एक योद्धा की तरह कर रहा है । कलेक्टर से लेकर नेताओं तक दबाव भी झेल रहा है । ऊपर से जनता की आलोचना ।

निकम्मी सरकार के निकम्मेपन का खामियाजा जनता के साथ ही सरकारी अस्पताल भी भोग रहे हैं । हर कोई चाहता है कि उसे वीआईपी ट्रीटमेंट मिले पर वो संभव नहीं है । अस्पताल का स्टॉफ, डॉक्टर बिना आराम किये लगातार काम करते हुए असीम धैर्य का परिचय दे रहे हैं । जरूरत है उन्हें सभी के सहयोग की ।अस्पताल स्टॉफ और डॉक्टर से सवाल जवाब करने की जरूरत नहीं है ।

सवाल जवाब करना ही है तो अपने द्वारा चुने जनप्रतिनिधियों से कीजिए । जनप्रतिनिधियों के गिरेबान में हाथ डालिये । उनकी कालर पकड़िए । उनके घरों पर धरना प्रदर्शन कीजिए , क्योंकि इनके निकम्मेपन की नाकामियों का खामियाजा ही तो आम आदमी भोग रहा है । मगर ऐसा नहीं किया जाता । जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है मीडिया । मगर दुर्भाग्य से मीडिया अपने जमीर को बेचकर नेताओं के तलवे चाटने में स्वर्गीय सुख का अनुभव कर रहा ।

जनता की आवाज को मुखर नहीं करने का दुष्परिणाम अब मीडियाकर्मियों को भी भोगना पड़ रहा है । नेताओं का दरबारी बन कर मीडिया मालिकों ने मीडियाकर्मियों की औकात दो कौड़ी की बनाकर रख दी है । कोरोना संक्रमण के कहर से मची अफरातफरी पर सवाल किए जाने पर नेता अपना आपा खोकर सड़कछाप भाषा बोलने लगे हैं । मारने पीटने पर उतारू हो रहे हैं ।

गत दिनों दमोह से सांसद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने जिस तरह का व्यवहार जिला अस्पताल दमोह में अपनी पत्नी का ईलाज करा रहे बांदकपुर के पत्रकार दिनेश शुक्ला से किया गया वह निंदनीय था । पत्रकार जगत प्रहलाद पटेल के कुकृत्य की रोषपूर्ण भर्त्सना करता है ।

पत्रकार को पूरा हक है कि वह जनप्रतिनिधियों से जवाब सवाल करे । मगर मंत्री पद के नशे में मदहोश प्रहलाद पटेल ने अपना आपा खोते हुए दिनेश शुक्ला को मारने तक की धमकी दे दी । मीडिया के सामने अपनी छीछालेदर होते देख अपनी गलती का ठीकरा उस पत्रकार पर ही अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाकर समझाइश देने की मासूमियत दिखाने लगे । अपनी सरकार की नाकामियों से मुकरते हुए ऑक्सीजन की कमी नहीं होने का सफेद झूठ बोल कर चलते बने । प्रशासन भी तो यही चाहता था ।

अभावों के चलते आखिरकार दिनेश शुक्ला की पत्नी ने दम तोड़ ही दिया । सवाल है इस मौत की जिम्मेदारी प्रहलाद पर क्यों नहीं ?

सरकार के दरबार में हाजिरी लगाकर सरकारी और दरबारी मीडिया द्वारा लगातार झूठ परोसने के नतीजे भी सामने आ रहे हैं । कोविड 19 के तहत जारी गाईड लाईन, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश ढेर हो रहे हैं । समुचित ईलाज के अभाव में पूरे प्रदेश में लगातार मौतों का आंकड़ा रिकॉर्ड उंचाई छूने की ओर अग्रसर हो रहा है । मंडला में भी ईलाज की कमी के चलते तीन पत्रकारों सन्तोष तिवारी, मदन पराते, सलिल राय को काल के मुहं में समाना पड़ गया । लगता तो है प्रदेश में शव …..राज कायम है ।

अब रेमडिसिवर इंजेक्शन के साथ ही ऑक्सीजन की भी कालाबाजारी की खबरें आ रही है ।

जब प्रशासन और पुलिस प्रशासन कोविड 19 से जूझ रहा है । जहां एक ओर पुलिस मॉस्क विहीन चेहरे ढूढ़ने में व्यस्त है तो वहीं दूसरी ओर आपदा को अवसर बनाकर माफ़िया उत्खनन कर मस्त हो रहा है । आम आदमी को तो लॉक डाउन के कारण रोजी रोटी के भी लाले पड़ रहे हैं। लॉक डाउन पर निर्णय भी वही ले रहे हैं जिनके पेट बिना डकार लिए गले से ऊपर तक भरे हुए हैं ।

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें