
यदि हौंसला बुलंद हो, तो कोई भी काम कठिन नहीं होता है। यह बात सच कर दिखाई है दतिया जिले के ग्राम धमना गांव की रहने वाली अंजलि विश्वकर्मा ने। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से परिवार की तस्वीर बदल कर रख दी। और तो और, लॉकडाउन भी उनके हौंसले को नहीं ढिगा पाया और उनका काम पहले की तरह ही चलता रहा।
अंजलि विश्वकर्मा ने विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बीच ईंट भट्टे का सफल कारोबार करके यह साबित कर दिया है कि अगर महिलाएं चाहें, तो परिवार की हालत बदल सकती हैं। उनके पति एक छोटे से किसान थे। खेती बारिश पर निर्भर होने के कारण सालभर में केवल एक फसल हो पाती थी। जैसे-तैसे जीवन चल रहा था। अंजलि ने परिवार की स्थिति बदलने की ठानी। इसके लिए उन्होंने स्वसहायता समूह में शामिल होना तय किया।
मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से वह जमुना स्वसहायता समूह में शामिल हेा गईं। वह समूह की अध्यक्ष हैं। अंजलि ने ईंट भट्टा व्यवसाय को अपनाकर अपनी जिंदगी संवारने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने ग्राम संगठन से बीस हजार रूपये का ऋण लिया। इस व्यवसाय से जुड़कर अंजलि ने अपनी मेहनत की बदौलत कामयाबी की इबारत लिख डाली। कोरोना के कारण लॉकडाउन से तमाम उद्योग धंधों का काम प्रभावित हुआ, लेकिन ईंट भट्टा इस विपरीत समय में भी अंजलि के लिए लाभ का धंधा बना रहा। वह इससे लगातार मुनाफा कमा रही हैं।
अंजलि की कमाई से परिवार की आजीविका पहले की तरह लॉकडाउन में भी अच्छी चलती रही। उन्होंने पक्का मकान बनवा लिया तथा उनके दो बच्चे प्रायवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं। अभी उनके ईंट भट्टे में करीब 30 हजार रूपये की ईंटें रखी हैं। अंजलि बताती हैं कि परिवार की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने ईंट भट्टे का व्यवसाय शुरू किया। कमाई होती रही और लॉकडाउन में भी कमाई पर असर नहीं पड़ा। ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमती संतमती खलको ने बताया कि ग्रामीण अंचल की महिलाएं आत्मनिर्भर होकर अपनी आजीविका चला रही हैं। उनका काम लॉकडाउन के बावजूद प्रभावित नहीं हुआ।