मैहर वाली शारदा माता धाम से एक अनमोल चिंतन….. रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम से।
(मैहर) सुख व्यक्ति के अहंकार की परीक्षा लेता है तो दुःख व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा लेता है। दोनों परीक्षा में उत्तीर्ण व्यक्ति का जीवन ही एक सफल जीवन कहलाता है।
रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम कहती है कि रावण हो, कंस हो अथवा दुर्योधन कौरव हो, इन सबके जीवन की एक ही कहानी है कि जीवन में जितना सुख और विलास आया उतना अभिमान भी बढ़ता चला गया।दुखों के प्रवाह में धैर्य का बांध उसी प्रकार टूट जाता है जैसे बरसाती नदी के वेग में लकड़ी का छोटा सा पुल। सुख के क्षणों में अहंकार को जीतने वाला और दुख के क्षणों में धैर्य धारण करने वाला ही वास्तव में इस जीवन रूपी महासंग्राम का एक सफल योद्धा है।
रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम कहती है कि निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें, हमारे निर्णय पर हमारी मंजिल निर्भर करती है।
आप सभी को सादर नमन।मैहर वाली शारदा माता सदा अपना आशीर्वाद कृपा बनाये रखे।
✍️ रवीन्द्र सिंह (मंजू सर)
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मैहर
