ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतो का निराकरण समय पर करें-कलेक्टर

( श्योपुर )

समय सीमा के प्रकरणो की समीक्षा बैठक में अधिकारियो को दिये निर्देश

कलेक्टर श्री राकेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि ऑनलाइन पोर्टल पर  केन्द्र एवं राज्य सरकार से प्राप्त शिकायतो का इन्द्राज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिसमें अंतर्गत विभिन्न विभागो में दर्ज पेन्डिग शिकायतो का निराकरण समय सीमा में किया जावे। साथ ही विभागवार पेडेन्सी के लिए अलग से अधिकारी/कर्मचारी लगाये जावे। जिससे सीएम हेल्पलाइन, पीजी टीएल, समय सीमा के प्रकरण निराकरण करने में आसानी होगी। वे आज कलेक्टर कार्यालय श्योपुर के सभागार में समय सीमा कें प्रकणो की समीक्षा के दौरान विभागीय अधिकारियों को दिशा निर्देश दे रहे थे।
बैठक में अपर कलेक्टर/सीईओ जिला पंचायत श्री एसआर नायर, एसडीएम श्री रूपेश उपाध्याय, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास श्री ओपी पाण्डेय, सीएमएचओ डॉ बीएल यादव, जिला शिक्षा अधिकारी श्री वीएस रावत, जिला आपूर्ति अधिकारी श्री एनएस चौहान, उपसंचालक कृषि श्री पी गुजरे, मेनेजर लोक सेवा श्री योगेश पुरोहित, कार्यपालन यंत्री पीएचई श्री संतोष श्रीवास्तव, पीडब्ल्यूडी श्री संकल्प गोलिया, पीआईयू श्री विपिन सोनकर, जिला आबकारी अधिकारी श्री योगेश कम्ठान, सहायक संचालक मछली पालन श्री बीपी झसिया, श्री पंकज शर्मा, ओबीसी कु. निकिता तामरे, सीईओ जनपद श्री एबी प्रजापति, अधीक्षक भू-अभिलेख श्री अनिल शर्मा, तहसीलदार बडौदा श्री भरत नायक, श्योपुर श्री राघवेन्द्र कुशवाह, जिला पंचायत की श्रीमती राजेश शर्मा, एंव अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री आरके श्रीवास्तव ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियो से प्राप्त होने वाले पत्रो का निराकरण समय पर किया जावे। उन्होने कहा कि टीएल से संबंधित विभिन्न प्रकार के आवेदन निर्धारित समय सीमा में निराकृत किये जावे। उन्होने कहा कि जो विधानसभा प्रश्न पोर्टल के माध्यम से विभिन्न विभागो के अंतर्गत प्राप्त हुए है। उनमें जबाव की एन्ट्री शीघ्र कराई जावे। साथ ही विभाग में सीधे आने वाले विधानसभा के प्रशनो का उत्तर संबधित विभागो के कार्यालय प्रमुखो को भिजवाये जावेे। साथ ही उनकी प्रति कलेक्टर कार्यालय के ओएस शाखा को भेजी जावे। जिससे विधानसभा प्रश्नो का उत्तर देने में आसानी होगी।
कलेक्टर ने विभिन्न विभागो के अंतर्गत लंबित सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणो की समीक्षा प्रजेन्टेशन के माध्यम से देखी। जिसके अंतर्गत उर्जा विभाग की 260, राजस्व की 252, पंचायतीराज की 217, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति की 164, लोक स्वास्थ्य की 97, नगरीय निकायो की 89, संस्थागत वित्त की 83, प्रधाानमंत्री आवास की 65, लोक शिक्षण की 63, एलडीएम की 60, पीएचई की 59, सामाजिक न्याय की 54, कृषि की 51, महिला बाल विकास की 46, वन की 45, पुलिस की 39, फसल ऋण माफी की 38, किसान क्रेडिट कार्ड की 36,  स्वच्छ भारत मिशन की 34, लोक निर्माण की 31, सामान्य प्रशासन की 28, फसल बीमा की 26, जिला अस्पताल की 25, सीमांकन की 22, अनुसूचित जाति की 15, डीपीसी की 15, खनिज की 14, खसरा-खत्तोनी की 12 सहित अन्य विभागो के अंतर्गत 11 से लेकर 01 तक की शिकायते लंबित है। जिनका निराकरण एक सप्ताह में होना चाहिए।

विभिन्न विभागो में पेंशन प्रकरणो का निराकरण

अपर कलेक्टर श्री एसआर नायर ने टीएल बैठक में विभिन्न विभागो के अधिकारियो से कहा कि आपके कार्यालय से सेवानिवृत्त शासकीय सेवको के लंबित पेंशन प्रकरण एवं आगामी दो माह में सेवा निवृत्त होने वाले सेवाको के पेंशन प्रकरण जिला पेंशन कार्यालय श्योपुर में निराकरण के लिए शीघ्र प्रस्तुत किये जावे। उन्होने कहा कि सेवा निवृत्त कर्मचारियों के पेंशन प्रकरण आईएफएमआईएस परियोजना के अतंर्गत पेंशन मॉड्यूल से ऑनलाइन व भौतिक रूप से प्रस्तुत करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जावे। जिससे सेवा निवृत्त अधिकारी/कर्मचारियों को सेवा निवृत्त उपरांत प्राप्त लाभो को समय सीमा में दिया जा सकें।

अधिकारी/कर्मचारियों को समयमान वेतनमान की सुविधा

कलेक्टर श्री राकेश कुमार श्रीवास्तव ने टीएल बैठक में कहा कि विभिन्न विभागो के अंतर्गत ऐसे अधिकारी/कर्मचारी जिन्होने समयमान वेतनमान प्राप्त की अवधि पूर्ण कर ली है। साथ ही समयमान वेतनमान के दायरे में आ गये है। उन विभागो के कार्यालय प्रमुख अपने अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित करे। जिससे अधिकारी/कर्मचारी समयमान वेतनमान प्राप्त कर अपने कार्य को और मुस्तैदी से समय सीमा में पूर्ण करने के लिए सहायक बन सकें।

लंबित जांच प्रकरणो का किया जावे निराकरण

कलेक्टर श्री राकेश कुमार श्रीवास्तव ने टीएल बैठक मे कहा कि जिन-जिन विभागो के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की लंबित जाचं प्रकरण शेष है। उनकी जांच रिपोर्ट शीघ्र तैयार की जाकर, प्रकरण का निराकरण किया जावे। जिससे संबंधित प्रकरण में प्रतिवेदन देने के बाद जांच पूर्ण होने पर उसका निराकरण होगा। साथ ही पेडेन्सी से निजात मिलेगी।

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