खाद संकट पर किसानों का गुस्सा फूटा, एसडीएम कार्यालय का घेराव

नायब तहसीलदार ने की टोकन वितरण की घोषणा, कृषकों को मिली आंशिक राहत

(मैहर) बरसाती मौसम की चरम बेला में जब खेतों को खाद–बीज की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, तभी मैहर अंचल में खाद की किल्लत ने अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा दीं। इस त्राहिमाम् स्थिति से व्यथित किसान गत दिवस संगठित होकर एसडीएम कार्यालय के मुख्य द्वार पर आ डटे।

सुबह से ही खेत खलिहान छोड़कर किसान बैलगाड़ी, मोटरसाइकिल और पैदल जत्थों में प्रशासनिक कार्यालय की ओर बढ़ने लगे। कार्यालय के प्रवेशद्वार पर पहुँचकर उन्होंने दरी चटाई बिछा दी और नारेबाज़ी करते हुए धरने पर बैठ गए। भीड़ बढ़ती गई और देखते ही देखते कार्यालय परिसर आंदोलनरत किसानों से अटा पड़ा।

किसानों की व्यथा सुनते ही मैहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी तथा आप नेता पुष्पेंद्र सिंह भी मौके पर पहुँचे। दोनों नेताओं ने किसानों का हौसला बढ़ाया और प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद स्थापित किया।

दोपहर तक चली लंबी बातचीत में किसान अपनी समस्या पर अडिग रहे कि बिना तत्काल समाधान आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। अंततः नायब तहसीलदार को किसानों की जायज़ मांग माननी पड़ी और उन्होंने खाद वितरण के लिए टोकन प्रणाली लागू करने की घोषणा की।

धरने पर बैठे अनेक किसानों ने कहा कि हमारे खेत बोवाई के इंतज़ार में हैं। हर दिन की देरी हमारी मेहनत को चौपट कर रही है। खाद के अभाव में फसल का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि प्रशासन जल्द ही पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराता, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।

इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि इस राष्ट्र की जीवनधारा है। यदि किसान रोएगा तो समूचा समाज संकट में पड़ जाएगा। कांग्रेस पार्टी हर परिस्थिति में कृषकों के साथ खड़ी है। यह संघर्ष केवल खाद के लिए नहीं, बल्कि किसान की इज़्ज़त और हक़ की लड़ाई है। प्रदर्शन और वार्ता के उपरांत प्रशासन ने किसानों को आश्वस्त किया कि आगामी दिनों में खाद आपूर्ति सुचारू करने के लिए उच्च स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। टोकन वितरण व्यवस्था से अब हर किसान को समान अवसर मिलेगा और कालाबाज़ारी पर भी रोक लगेगी। यह प्रदर्शन केवल खाद संकट का प्रतिरोध नहीं, बल्कि किसानों की संगठित शक्ति का प्रतीक है। यह घटना प्रशासन को चेतावनी देती है कि यदि किसान की आवाज़ समय रहते नहीं सुनी गई, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

✍️ देवेश शर्मा
RPKP INDIA NEWS
         मैहर

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें