271 प्रकरणों में अत्याचार पीड़ितों को 2 करोड 28 लाख रूपये की सहायता स्वीकृत
जिला सतर्कता एवं मानीटरिंग समिति की बैठक संपन्न
(सतना) अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से नवम्बर 2025) में 271 प्रकरणों में अब तक 2 करोड 28 लाख 61 हजार 250 रूपये की सहायता स्वीकृत की गई है। इस आशय की जानकारी कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. सतीश कुमार एस की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में संपन्न जिला सतर्कता एवं मॉनीटरिंग समिति की बैठक में दी गई। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, अपर कलेक्टर विकास सिंह, जिला संयोजक डॉ. अरूण शुक्ला, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला, समिति के सदस्य मुरानी सोनी, अभिनव त्रिपाठी, रामकलेश साकेत, बृजेश अहिरवार उपस्थित थे। जिला सतर्कता एवं मॉनीटरिंग समिति की बैठक में बताया गया कि अपै्रल 2025 से नवम्बर 2025 तक जिले में अत्याचार पीड़ितों के 271 प्रकरणों में अब तक 2 करोड 28 लाख 61 हजार 250 रूपये की आर्थिक सहायता हितग्राहियों को स्वीकृत की गई है। जिसमें अनुसूचित जाति के 198 मामलो में 1 करोड 70 लाख 11 हजार 250 रूपये और अनुसूचित जनजाति के 73 मामलों में 58 लाख 50 हजार रूपये की राशि योजना के प्रावधान के तहत स्वीकृत की गई है। इसके अलावा वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति के 82 प्रकरण में 78 लाख 69 हजार रूपये एवं अनुसूचित जनजाति के 51 प्रकरण में 42 लाख रूपये का भुगतान आवंटन के अभाव में लंबित है। बैठक में बताया गया कि अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत जनवरी 2025 से 30 नवम्बर 2025 की स्थिति में अनुसूचित जाति वर्ग के 159 एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की 45 शिकायतें प्राप्त हुई है। जिसमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के 80 मामले और अनुसूचित जाति के 16 मामले लंबित है। कलेक्टर ने कहा कि 60 दिन से अधिक के 20 प्रकरण लंबित है। जाति प्रमाण पत्र के अभाव में लंबित प्रकरणों को टीएल की बैठक में रखे। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रकरणों के डिस्पोजल में अधिक प्रयास करने की जरुरत है। प्रकरणों का तीव्र गति एवं व्यक्तिगत रुचि लेकर निराकरण करने का प्रयास करें। कलेक्टर ने कहा कि अत्याचार निवारण अधिनियम के स्वीकृत प्रकरणों में लंबित भुगतान के लिए बजट आवंटन हेतु शासन को प्रस्ताव भेजें।
