BSF के वीर सपूत सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी का कैमोर में ऐतिहासिक स्वागत, 40 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद होली पर घर वापसी
(कैमोर) होली के पावन अवसर पर कैमोर नगर ने गर्व और भावनाओं से भरा ऐतिहासिक क्षण देखा, जब नगर के वीर सपूत सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी 40 वर्षों की अदम्य सेवा के बाद अपने गृह नगर लौटे। उनकी घर वापसी ने पूरे शहर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।

सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी ने मात्र 21 वर्ष की आयु में मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लेते हुए Border Security Force (बीएसएफ) में भर्ती ली थी।

चार दशकों तक सीमाओं पर साहस, अनुशासन और निष्ठा के साथ सेवा देते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

28 फरवरी को वे आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्त हुए। उनकी अंतिम पदस्थापना जम्मू-कश्मीर में रही, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण हालातों के बीच उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।

नगर में उनके आगमन पर ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ भव्य स्वागत किया गया। नगर परिषद कैमोर के पूर्व अध्यक्ष गणेश राव ने शाल भेंट कर एवं पुष्प वर्षा कर उनका सम्मान किया।

कैमोर नगर की अशासकीय संस्था मनोज मानव विकास समिति के अध्यक्ष संतोष प्रसाद तिवारी ने पुष्प गुच्छ एवं श्रीफल भेंट कर उनका सम्मान किया। नगर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पमालाओं से उनका अभिनंदन किया। “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों से पूरा वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो उठा।

नीतू किराना दुकान के संचालक ने पुष्पमाला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को रसगुल्ले वितरित कर होली की शुभकामनाएं दी गईं। नगर के गणमान्य नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भी जगह-जगह उनका सम्मान कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

गृह नगर पहुंचने पर सूबेदार द्विवेदी सबसे पहले लाल नगर स्थित हनुमान जी के मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात अपने निवास पहुंचकर गौ माता की पूजा की। यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए भावुक कर देने वाला रहा, जहां एक सच्चा सैनिक अपनी मातृभूमि और संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट करता नजर आया।
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सूबेदार के पद पर रहते हुए वीरेंद्र द्विवेदी ने कंपनी स्तर पर नेतृत्व करते हुए अपने अधीनस्थ जवानों का मार्गदर्शन किया और अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया।

उनकी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर उनके पुत्र चंदन द्विवेदी ने गर्व व्यक्त किया। परिवार सहित पूरे नगर को उनके योगदान पर गर्व है। कैमोर नगर के लिए यह केवल एक स्वागत समारोह नहीं, बल्कि देशभक्ति और सम्मान का उत्सव बन गया।

चार दशकों तक देश सेवा के बाद जब कोई सैनिक अपने नगर लौटता है, तो वह समर्पण, त्याग और राष्ट्रप्रेम की जीवित मिसाल बनकर लौटता है।

सूबेदार वीरेंद्र द्विवेदी ने अपने कर्म और कर्तव्यनिष्ठा से कैमोर का नाम देशभर में रोशन किया है। उनकी घर वापसी का यह ऐतिहासिक दिन लंबे समय तक नगरवासियों की स्मृतियों में अंकित रहेगा।
✍️ (संतोष प्रसाद तिवारी)
RPKP INDIA NEWS
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