₹18.48 लाख करोड़ की ओर बढ़ती MP की अर्थव्यवस्था, ₹4.38 लाख करोड़ का बजट देगा रफ्तार

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राजस्व अधिशेष, ₹80 हजार करोड़ से ज्यादा पूंजीगत निवेश और किसान कल्याण पर बड़ा फोकस

भोपाल | RPKP India News मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था तेज़ रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य की जीएसडीपी बढ़कर करीब ₹18.48 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के ₹16.48 लाख करोड़ के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए ₹4.38 लाख करोड़ के बजट में विकास, अधोसंरचना, सामाजिक सुरक्षा और किसान कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। बजट संकेत देता है कि प्रदेश न केवल आर्थिक विस्तार की ओर बढ़ रहा है, बल्कि संतुलित विकास मॉडल भी अपनाया जा रहा है।

राजस्व अधिशेष और मजबूत वित्तीय स्थिति

सरकार ने इस वर्ष ₹44 करोड़ के राजस्व अधिशेष का अनुमान जताया है, जो वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन का संकेत है। कुल राजस्व प्राप्तियां लगभग ₹3.08 लाख करोड़ और पूंजीगत प्राप्तियां करीब ₹80 हजार करोड़ रहने का अनुमान है।

₹80 हजार करोड़ से ज्यादा पूंजीगत निवेश

अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए सरकार ने ₹80,266 करोड़ का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया है, जो जीएसडीपी का लगभग 4.8% है। इससे औद्योगिक विकास, शहरी सुविधाओं और ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई ऊर्जा मिलेगी।

विभागों के बजट में बड़ा इजाफा

विकास योजनाओं को तेजी देने के लिए कई प्रमुख विभागों के बजट में वृद्धि की गई है। ग्रामीण विकास में 37%, नगरीय विकास में 16%, महिला एवं बाल विकास में 26%, राजस्व विभाग में 43% और स्कूल शिक्षा में 11% की बढ़ोतरी प्रस्तावित है। इससे सामाजिक और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।

किसान समृद्धि पर विशेष ध्यान

सरकार ने कृषि और किसानों को प्राथमिकता देते हुए ₹88,910 करोड़ का बजट प्रावधान किया है, जो गैर-बजटीय संसाधनों सहित करीब ₹1.15 लाख करोड़ तक पहुंचता है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, कृषि को आधुनिक बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

महिला और सामाजिक कल्याण योजनाएं

महिला सशक्तिकरण के तहत लाड़ली बहना योजना के लिए करीब ₹23,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वीबीजी योजना, किसान कल्याण योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए भी हजारों करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ₹23,747 करोड़ और सामाजिक-आर्थिक योजनाओं के लिए ₹1.83 लाख करोड़ का बजट रखा गया है, जिसमें अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं।

नई योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल

सरकार ने द्वारका योजना, स्वामित्व योजना और यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना जैसी दीर्घकालिक योजनाओं की भी घोषणा की है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों, पशुपालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

इसके साथ ही सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए भी लगभग ₹3,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे धार्मिक पर्यटन और अधोसंरचना को बढ़ावा मिलेगा।मध्यप्रदेश का यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि राज्य तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है, जहां अधोसंरचना, कृषि, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के संतुलित निवेश से विकास की नई गति तय की जा रही है।

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