सांदीपनि विद्यालयों की हकीकत उजागर: 64% तक छात्र फेल, शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल — जीतू पटवारी
(भोपाल) मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू)पटवारी ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बड़े-बड़े दावों के साथ शुरू किए गए ‘सांदीपनि विद्यालय’ आज अपनी बदहाली और गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता के कारण चर्चा में हैं।
हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार राजधानी भोपाल के एक सांदीपनि विद्यालय में 64% तक विद्यार्थी फेल हो गए हैं। नौवीं कक्षा का परिणाम मात्र 48% और 11वीं का 76% रहा, जो सामान्य स्कूलों से भी खराब है। यह स्थिति बताती है कि सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
श्री पटवारी ने कहा कि सरकार लगातार स्कूलों के नाम बदलती रही—पहले मॉडल स्कूल, फिर सीएम राइज और अब सांदीपनि विद्यालय—लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च कर सुविधाओं और प्रशिक्षण की बातें की गईं, लेकिन जमीन पर परिणाम शून्य हैं।
उन्होंने कहा कि भोपाल जिले के बैरसिया में नौवीं के 64% छात्र फेल होना, बड़ई में 61% छात्रों का फेल होना, और कई विद्यालयों में बेहद खराब परिणाम आना इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
श्री पटवारी ने कहा कि सरकार शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने के बजाय उन्हें बार-बार पात्रता परीक्षाओं में उलझा रही है। इससे शिक्षकों में असुरक्षा का माहौल है, खासकर वे शिक्षक जो सेवानिवृत्ति के करीब हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्वयं विधानसभा में स्वीकार कर चुकी है कि हजारों स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं—बालिका एवं बालक शौचालयों की कमी, जर्जर भवन और संसाधनों का अभाव। लगभग 44,000 स्कूलों को मर्ज करने के नाम पर बंद कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
श्री पटवारी ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग में लगभग 40% पद रिक्त हैं, वहीं उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थिति भी बेहद खराब है, जहां शिक्षकों को महीनों तक वेतन नहीं मिल रहा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 26 लाख से अधिक युवा बेरोजगार हैं, लेकिन सरकार रोजगार और भर्ती को लेकर गंभीर नहीं है। MPPSC में सीमित पदों पर भर्ती निकालना सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।
अंत में श्री पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे केवल प्रचार और कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के बजाय शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएं, अन्यथा कांग्रेस पार्टी प्रदेशभर में आंदोलन करने को बाध्य होगी।
