6वीं मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियों को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए प्रभावी अंतरविभागीय समन्वय जरूरी : श्री भरत यादव
लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की बाधाओं के समाधान, श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों और नवाचारों पर हुआ विचार-विमर्श

(भोपाल)  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली 6वीं मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के संबंध में गुरुवार को एमपीआरडीसी मुख्यालय, भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। प्रबंध संचालक श्री भरत यादव की अध्यक्षता में “एक्‍सलेरेटिंग लीनियर इन्फ्रॉस्ट्रक्चर प्रोजेक्टस् : गुड प्रेक्टिसेस एण्ड न्यू आईडियाज” विषय पर आयोजित कार्यशाला में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं, उनके व्यावहारिक समाधान तथा विभिन्न विभागों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नवाचारों पर चर्चा की गई।

प्रबंध संचालक श्री यादव ने कहा कि परियोजनाओं के लिए आवश्यक अनुमतियां समय पर प्राप्त करने और निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए विभागों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। परियोजना शुरू होने से पहले विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने का कार्य पूरी गंभीरता से किया जाना चाहिए। इससे अनुमतियों एवं अन्य संभावित बाधाओं की पहचान प्रारंभिक स्तर पर कर उनका समय रहते समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

प्रबंध संचालक श्री यादव ने सभी विभागों के प्रतिनिधियों से फीडबैक फॉर्म अनिवार्य रूप से भरने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों में से श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों और उपयोगी नवाचारों का चयन कर नीति आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

एमपीआरडीसी के तकनीकी सलाहकार श्री आर.के. मेहरा ने स्वागत वक्तव्य में कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्यों के अनुरूप लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने और आवश्यक अनुमतियों में होने वाले विलंब को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न विभागों के अनुभवों और श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों की जानकारी फीडबैक फॉर्म के माध्यम से नीति आयोग को उपलब्ध कराई जाएगी।

वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री एच.एस. मोहंता ने परिवेश पोर्टल, वन भूमि के व्यपवर्तन तथा ईको-सेंसिटिव जोन, जैव विविधता क्षेत्रों, अभयारण्यों और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अनुमतियों से संबंधित प्रक्रियाओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों की जानकारी दी। उन्होंने निर्माण परियोजनाओं के दौरान पौधरोपण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए भी सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यशाला में भू-अर्जन, आरओडब्ल्यू/आरओयू, वन एवं वन्य जीव स्वीकृति, यूटिलिटी शिफ्टिंग, राज्य स्तरीय अनुमतियों तथा निर्माण सामग्री से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। एमपीआरडीसी के भू-अर्जन एवं पर्यावरण विशेषज्ञों ने भू-अर्जन प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया।

लोक निर्माण विभाग, एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, एनएचएआई, नीति आयोग, भारतीय रेलवे, आईओसीएल, राजस्व विभाग, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, भोपाल विकास प्राधिकरण, मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, नगरीय विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, एमपी मेट्रो, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम सहित विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रेजेंटेशन देकर अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए।

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