कलेक्‍टर श्री तिवारी ने समय-सीमा में आवेदनों के निराकरण हेतु दिये निर्देश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

(कटनी)  जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्यवन हेतु जिले में 21 जून तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत म.प्र. लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों के निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने हेतु कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी ने समस्‍त विभाग प्रमुखों, पदाभिहित अधिकारियों एवं अपीलीय अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं।

कलेक्‍टर श्री तिवारी ने निर्देशित किया है कि पदाभिहीत अधिकारी आवेदनों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा के पूर्व किया जाना सुनिश्चित करें, यदि किसी आवेदन को निरस्त किया जाता है, तो आदेश में उसके स्पष्ट कारणों का उल्लेख करना अनिवार्य है। प्रथम अपीलीय अधिकारी को अधिकार दिया गया है कि वे स्वप्रेरणा से अपने अधीनस्थ किसी भी पदाविहीत अधिकारी के समक्ष ऐसे आवेदन जिसमें समय-सीमा में कार्यवाही नहीं हुई है, अथवा जिन्हें अस्वीकार्य कर दिया गया है, उनका अभिलेख बुलाकर यथोचित आदेश पारित करें एवं यदि पदाभिहीत अधिकारी द्वारा जानबूझकर सेवा देने में विलंब किया गया है या इंकार किया गया है तो उस पर शास्ति अधिरोपित किये जाने के प्रयोजन से प्रकरण को द्वितीय अपीलीय अधिकारी की ओर भेज सकते हैं।

इसके साथ ही प्रत्येक दिवस लोक सेवा गारंटी अधिनियम अंतर्गत प्राप्त आवेदन एवं एक दिवस समाधान के आवेदनों का निराकरण समय-सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही कलेक्‍टर ने कहा है कि एक दिवस समाधान के प्राधिकृत अधिकारी लोक सेवा केन्द्र मे नियमानुसार उपस्थित होकर निराकरण सुनिश्चित करें अन्यथा जिम्मेदारी तय की जावेगी।

रिकार्ड रूम एवं तहसील स्तरीय रिकार्ड रूम से नकल संबंधी आवेदनों का निराकरण भी निर्धारित समय-सीमा के 1 दिवस पूर्व कर लोक सेवा केन्द्र को प्रेषित करना अनिवार्य किया गया है। कार्यालय प्रमुख एवं पदाभिहीत अधिकारी नियुक्त वाहक की समीक्षा कर सुनिश्चित करेंगे, कि समय-सीमा में आवेदन एवं सेवाएं समय-सीमा में नागरिकों को प्राप्त होने हेतु लोक सेवा केन्द्र में पहुंचे।

कलेक्‍टर श्री तिवारी ने स्‍पष्‍ट किया है कि ऐसे आवेदनों पर जिसमें आवेदक द्वारा चाही गई सेवा या अपील को जानबूझकर निर्धारित समय में नहीं दी गई है अथवा बगैर किसी कारण के उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया है। उन पर द्वितीय अपीलीय अधिकारी को अधिनियम के तहत पदाभिहीत अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी को आर्थिक दण्ड अधिरोपित किये जाने का अधिकार है।

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