रेत-गिट्टी से लदे भारी वाहनों ने बिगाड़ी बरही की ट्रैफिक व्यवस्था!, पुराना बस स्टैंड बना ‘मौत का चौराहा आज फिर मौत से लौटी तीन जिंदगियां
ट्रक के अगले पहिए में फंसी बाइक, मासूम समेत तीन लोग बाल-बाल बचे; अतिक्रमण, अव्यवस्थित यातायात और ओवरलोड वाहनों पर उठे गंभीर सवाल
(बरही)! बरही नगर की बदहाल यातायात व्यवस्था ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुराना बस स्टैंड चौराहे पर ऐसा भयावह हादसा हुआ, जिसने कुछ पल के लिए पूरे नगर की सांसें रोक दीं। एक भारी ट्रक ने मोटरसाइकिल सवारों को अपनी चपेट में ले लिया और बाइक ट्रक के अगले पहिए के नीचे जा फंस गई। बाइक पर दो युवकों के साथ एक छोटा मासूम बच्चा भी सवार था। स्थानीय लोगों की तत्परता और चालक द्वारा समय रहते ब्रेक लगाने से तीनों की जान बच गई, अन्यथा बरही एक और दर्दनाक सड़क हादसे का गवाह बन सकता था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मैहर रोड की ओर से आ रहा ट्रक जैसे ही विजयराघवगढ़ रोड की ओर मुड़ा, उसी समय खतौली रोड की तरफ जा रही मोटरसाइकिल उसकी चपेट में आ गई। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सीधे ट्रक के अगले पहिए में फंस गई। घटना होते ही चीख-पुकार मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने बिना अपनी जान की परवाह किए ट्रक के नीचे से बाइक और सवारों को सुरक्षित बाहर निकाला लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है क्या बरही में हर बार किस्मत ही लोगों की जान बचाएगी?
बरही नगर में यह कोई पहला हादसा नहीं है। पिछले कई वर्षों से ट्रैफिक अव्यवस्था, अतिक्रमण और दिन-रात गुजरने वाले रेत एवं गिट्टी से लदे भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर लगातार शिकायतें होती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता।
पुराना बस स्टैंड चौराहा आज अघोषित वाहन स्टैंड में तब्दील हो चुका है। रामलीला मंच के सामने खड़े वाहन, सड़क किनारे ठेलों का अतिक्रमण और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण यह चौराहा दुर्घटना संभावित क्षेत्र बन गया है। बड़े वाहनों को मोड़ने में परेशानी होती है और सामने से आने वाले वाहन स्पष्ट दिखाई नहीं देते।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मुख्य चौराहे पर नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस की तैनाती नहीं रहती। जाम लगने पर आम लोगों को ही सड़क पर उतरकर व्यवस्था संभालनी पड़ती है। पुलिस सूचना मिलने के बाद पहुंचती है, कुछ देर यातायात सुचारु कर वापस लौट जाती है और स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि नगर के बीचों-बीच दिन-रात रेत और गिट्टी से लदे भारी वाहन गुजरते हैं। कई वाहनों में ओवरलोड सामग्री भी होने का आरोप है। हादसे के कुछ ही देर बाद ऐसे कई भारी वाहन उसी मार्ग से गुजरते देखे गए। स्थानीय लोगों के अनुसार एक ट्रक पर केवल 500 रुपये का चालान कर उसे छोड़ दिया गया।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या औपचारिक कार्रवाई से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी?
नगरवासियों का कहना है कि यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया, भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित नहीं किया गया, ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई और स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो किसी दिन बरही में ऐसा हादसा होगा जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। आज तीन लोग बच गए, लेकिन कल शायद इतनी किस्मत साथ न दे।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं— क्या वह किसी बड़ी जनहानि का इंतजार करेगा या समय रहते बरही की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगा? जनता जवाब चाहती है।
✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
बरही
