गांधीग्राम में गूंजा जनजातीय स्वाभिमान का स्वर, “बंका बैगा” के मंचन ने जीवंत किया स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली इतिहास

भारत स्पीक्स थ्रू थिएटर अभियान के तहत जनजातीय वीरों के अदम्य साहस और बलिदान को किया गया नमन

(सीधी) वंदे मातरम् राष्ट्रगीत की सार्धशती के उपलक्ष्य में आयोजित “भारत स्पीक्स थ्रू थिएटर – युवा रंगमंच से राष्ट्र जागरण” अभियान के अंतर्गत संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली एवं इन्द्रवती नाट्य समिति, सीधी के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम गांधीग्राम में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बांकेलाल उर्फ बंका बैगा के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर आधारित भव्य रंगमंचीय नाटक “बंका बैगा” का भावपूर्ण मंचन किया गया। जनजातीय स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत इस प्रस्तुति ने दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के उन अमर सेनानियों के अद्वितीय योगदान से परिचित कराया, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका।

कार्यक्रम का शुभारंभ बंका बैगा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन तथा वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर बंका बैगा के परिजनों एवं उनके संघर्षकालीन सहयोगी इंद्रभान जायसवाल सहित अनेक वरिष्ठजनों का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया। उपस्थित अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों का भी सम्मान किया गया।

आयोजन का प्रमुख आकर्षण गांधीग्राम की गलियों में निकली भव्य जनजागरण रैली रही। बैगा सइला जनजातीय नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति ने स्थानीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। रैली के दौरान “बंका बैगा अमर रहें”, “रामभजन बैगा अमर रहें”, “चंद्रप्रताप तिवारी अमर रहें” और “नीलकंठ तिवारी अमर रहें” के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा गांधीग्राम राष्ट्रभक्ति और जनजातीय गौरव की भावना से ओत-प्रोत हो उठा। इसके पश्चात देशभक्ति से ओत-प्रोत भजन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को और अधिक प्रेरणादायी बना दिया।

अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का इतिहास भारत की अमूल्य धरोहर है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों, ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।

नाटक “बंका बैगा” में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान को लोकनाट्य शैली, प्रभावशाली अभिनय, सशक्त संवाद और संगीत के माध्यम से अत्यंत जीवंत ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया और पूरा परिसर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

नाटक में देवेंद्र तिवारी ने बंका बैगा, लकी चतुर्वेदी ने चंद्रप्रताप तिवारी, जय सिंह ने रामभजन बैगा, अमितेश द्विवेदी ने डॉ. राममनोहर लोहिया, प्रभात कुमार पटेल ने ददई सिंह, हिमांशु मिश्र ने जमुना प्रसाद शास्त्री, अकुंश पाण्डेय ने कलेक्टर एवं मुखिया, ओमकार पाण्डेय ने बंसपति राम शुक्ला, जगदेव सिंह, जनार्दन शुक्ला एवं सबाईलाल, वतन द्विवेदी और शुभ सिंह ने सूत्रधार, राम किशन साकेत ने भगबत, आकाश प्रजापति ने पी.ए. तथा शिव बहोर जायसवाल ने यदुनाथ सिंह की भूमिका का प्रभावी निर्वहन किया। समूह कलाकारों ने भी अपनी सशक्त प्रस्तुति से नाटक को जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम का संयोजन नीरज कुंदेर ने किया। प्रकाश परिकल्पना रजनीश कुमार जायसवाल, वस्त्र विन्यास प्रजीत कुमार साकेत, संगीत संयोजन हिमांशु मिश्र, लेखन एवं संगीत परिकल्पना रोशनी प्रसाद मिश्र तथा परिकल्पना एवं निर्देशन शिव नारायण कुंदेर द्वारा किया गया। मंच संचालन रोशनी प्रसाद मिश्र ने किया।

नाट्य प्रस्तुति के उपरांत सभी कलाकारों एवं तकनीकी दल का सम्मान किया गया। आयोजन की सफलता में बंका बैगा के परिजनों, गांधीग्राम ग्राम पंचायत, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इन्द्रशरण सिंह चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, कलाकार, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। आभार प्रदर्शन इंद्रभान जायसवाल ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

“बंका बैगा” का यह मंचन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि जनजातीय गौरव, राष्ट्रीय चेतना और भारतीय रंगपरंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन का एक सशक्त सांस्कृतिक अभियान सिद्ध हुआ, जिसने उपस्थित प्रत्येक दर्शक के मन में राष्ट्रप्रेम और अपने इतिहास के प्रति गौरव का भाव जागृत किया।

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