किसानों की आवाज़ दबाने के बजाय उनकी मांगें सुने सरकार, मुख्यमंत्री मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान जवाब दें : जीतू पटवारी
भोपाल (RPKP INDIA NEWS) मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि नर्मदापुरम के बरखेड़ा से प्रारंभ हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा का भोपाल पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश का किसान भाजपा सरकार की नीतियों से गहरे आक्रोश में है। हजारों किसान परिवार अपनी जायज़ मांगों को लेकर राजधानी की सड़कों पर डटे हुए हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय मौन धारण किए बैठी है।
श्री पटवारी ने कहा कि किसान मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों के हितों की रक्षा तथा केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं। ये कोई राजनीतिक मांगें नहीं, बल्कि किसानों के जीवन और आजीविका से जुड़े बुनियादी प्रश्न हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि जब मध्य प्रदेश का किसान अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहा है, तब मुख्यमंत्री संवेदनहीन बने हुए हैं और प्रदेश के किसान पुत्र होने का दावा करने वाले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी किसानों की पीड़ा पर चुप्पी साधे हुए हैं। यदि किसान अपनी उपज का उचित मूल्य, खाद और न्याय मांगने के लिए राजधानी तक पैदल आने को मजबूर हैं, तो यह भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों की सबसे बड़ी विफलता है।
श्री पटवारी ने कहा कि भाजपा ने चुनावों के दौरान किसानों से अनेक वादे किए थे, लेकिन आज वही किसान अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। सरकार को आंदोलन को दबाने के बजाय किसानों से तत्काल संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के इस लोकतांत्रिक संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी है। यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी की और दमन का रास्ता अपनाया, तो यह जनाक्रोश पूरे प्रदेश में और व्यापक होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की होगी।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकार से मांग की है कि—
– मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी तत्काल सुनिश्चित की जाए।
– MSP को कानूनी गारंटी देने के लिए केंद्र सरकार प्रभावी कदम उठाए।
– किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए।
– किसानों से किए गए सभी चुनावी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
– किसान संगठनों के साथ तत्काल संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
