धोखाधड़ी के आरोपी महेन्द्र गोयंका को 1.70 लाख मैट्रिक टन आयरन ओर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी कोई रियायत

महेंद्र गोयनका ने पिछले तीन सालों में हर स्तर पर की धोखाधड़ी और रची साजिश

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने जिओमिन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और यूरो प्रतीक के बीच चल रहे विवाद को लेकर बड़ा फ़ैसला देते हुए महेंद्र गोयंका का केस किया डिसमिस। कोर्ट ने कहा है कि जब तक कमर्शियल कोर्ट इस आवेदन पर अंतिम निर्णय नहीं लेती है तब तक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया अंतरिम प्रतिबंध जारी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी एस नरसिम्हा एव जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने यह निर्णय विधान अधिवक्ता बलवीर सिंह एव अधिवक्ता शर्मिला इराम फातिमा द्वारा की गईं बहस के बाद दिया। कोर्ट ने कमर्शियल कोर्ट को सीपीसी के आदेश 39 के नियम एक और दो के तहत लंबित आवेदन पर दो माह के भीतर फ़ैसला सुनाने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 अगस्त के अपने आदेश के बाद जबलपुर की कमर्शियल कोर्ट को 2 माह में जियोमिन इंडस्ट्रीज द्वारा यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया से 1 लाख 70 हजार टन आयरन ओर खरीदी (परचेज़ एग्रीमेंट)के बाद की गई धोखाधड़ी जिसमें खरीदी अनुबंध के बाद आयरन ओर न सप्लाई करने और अनुबंध का पालन न करने पर कोर्ट में दायर वाद पर फैसला करने के आदेश दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार मेसर्स जियोमिन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने जबलपुर के डिस्ट्रिक्ट जज कमर्शियल कोर्ट में मेसर्स यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से 1लाख 70 हजार टन आयरन ओर सेल और परचेज़ एग्रीमेंट करने के आधार पर खरीदा गया आयरन ओर प्राप्त करने के लिए कमर्शियल सूट फाइल किया है वर्तमान में यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया का प्राइमरी शेयर होल्डर रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका बना हुआ है।

यहां यह जानना जरूरी है कि यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को लेकर कई मामले पिछले दिनों और सालों में सुर्खियों में रहे हैं जिसमें महेन्द्र गोयनका के सहयोगी 3 डायरेक्टर्स हिमांशु श्रीवास्तव, सन्मति जैन और सुनील अग्रवाल एवं अन्य सहयोगी के विरुद्ध भी कटनी के कोतवाली और माधवनगर थाने में दो अलग-अलग प्रकरण 420/120B/467/468/471 की प्राथमिकी दर्ज हैं और गोयनका के तीनो डायरेक्टर की अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज होने के बाद भी पिछले दो साल से तीनो डायरेक्टर फरार हैं जिन्हें कटनी पुलिस आज तक गिरफ्तार नहीं कर पायी है। जाली दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, यूरो पैलेट कंपनी समेत कई कंपनियों पर अवैध नियंत्रण हासिल करने को लेकर मामला है।

इसी तरह कोलकत्ता में भी महेंद्र गोयनका पर हजारों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं और कंपनी के बिके हुए माल को छल-कपट करके बेचने से जुड़े मामले सहित फ़र्ज़ी तरीक़े से कंपनी के शेयर अपने और परिवार के नाम करवाने को लेकर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी 467/468/471 सहित अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी इस मामले में कोलकत्ता पुलिस ने ने जुलाई में दो वर्षों से फरार चल रहे रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार करते हुए दो बार 14 दिनों तक रिमांड में लेते हुए मामले में गहन जांच की है।

विदित हो कि पिछले साल ज्योमिन कंपनी को बिके हुए इसी आयरन ओर को महेंद्र गोयनका ने जबलपुर के एक पुलिस अधिकारी और एक प्रशासनिक अधिकारी की मदद से किसी तीसरी कंपनी को बेच दिया था तभी से जियोमिन कंपनी ने गोयनका के ऊपर केस कर रखा था जिसमे आज निर्णय आया है। जीयोंमिन कंपनी की ओर से विद्वान अधिवक्ता शर्मिला इरम फातिमा एवं सिद्धार्थ शुक्ला ने पैरवी की।

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