थानों में ‘नो एंट्री’, कप्तान के दरबार में ‘हाजिरी’: कटनी में पुलिसिंग पर उठते गंभीर सवाल
एसपी की जनसुनवाई में उमड़ा शिकायतों का सैलाब; जमीनी विवाद से लेकर महिला अपराध तक की गुहार, थाना प्रभारियों की कार्यशैली कटघरे में
कटनी। आम आदमी के लिए थाने इंसाफ की पहली चौखट होते हैं, लेकिन कटनी में हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में उमड़ी फरियादियों की भारी भीड़ ने जिले की थाना स्तरीय पुलिसिंग की पोल खोल कर रख दी है। पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के सामने दर्जनों मामलों का अंबार यह साबित करने के लिए काफी है कि थानों से आम जनता का भरोसा दरक रहा है और फरियादियों को इंसाफ की आस में सीधे कई किलो मीटर दूर ‘कप्तान के दरबार’ का रुख करना पड़ रहा है।
जनसुनवाई में सामने आए प्रमुख मामले
थानों में अनसुनी: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई आवेदक सीधे इस शिकायत के साथ पहुंचे कि संबंधित थाना प्रभारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
जमीनी कब्जे व धोखाधड़ी: जमीन, मकान और दुकान पर अवैध कब्जे, वित्तीय धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से फर्जी लोन निकालने के गंभीर मामले सामने आए।
पारिवारिक व महिला अपराध: घरेलू विवाद, ब्लैकमेलिंग और महिलाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर भी पीड़िताएं एसपी दफ्तर पहुंचीं।
व्यवस्था पर खड़े होते तीखे सवाल
यदि थाना स्तर पर शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निराकरण हो रहा है, तो हर मंगलवार एसपी कार्यालय में फरियादियों की कतारें क्यों लंबी हो रही हैं?
क्या जमीनी स्तर पर बीट प्रभारियों और थाना प्रभारियों की जवाबदेही तय नहीं है?
क्या थानों में आम आदमी की सुनवाई सिर्फ रसूख और पैरवी के दम पर ही संभव रह गई है?
एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के कड़े निर्देश दिए, जो फरियादियों के लिए राहत की बात है। हालांकि, असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि निर्देशों के बाद भी फाइलों में धूल न जमे और पीड़ित को दोबारा दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

जनसुनवाई अधिकारियों की संवेदनशीलता जरूर दर्शाती है, लेकिन यह जमीनी व्यवस्था की नाकामी का आईना भी है। जब तक थाना स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक कप्तान के दरबार में कतारें कम नहीं होंगी। अब देखना यह है कि लापरवाह थाना प्रभारियों पर कब तक सख्त कार्रवाई का चाबुक चलता है।

