जिला चिकित्सालय सीधी में दो दिवसीय निःशुल्क कैंसर जांच शिविर संपन्न, 83 संभावित मरीज चिन्हित

350 से अधिक मरीजों की हुई जांच, आयुष्मान भारत योजना के तहत होगा निःशुल्क उपचार

(सीधी)  कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देशानुसार जिला प्रशासन एवं शैल्बी हॉस्पिटल जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में जिला चिकित्सालय सीधी में 22 एवं 23 अगस्त को दो दिवसीय निःशुल्क कैंसर जांच एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर के प्रथम दिवस का शुभारंभ विधायक सीधी रीती पाठक तथा द्वितीय दिवस का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू  सिंह ने किया।शिविर में 350 से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 189 मरीजों की विशेष कैंसर स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 83 मरीजों को संभावित कैंसर के लक्षणों के आधार पर चिन्हित किया गया। शिविर में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर जांच और उपचार के महत्व के संबंध में मरीजों को जागरूक किया गया।

ऑन्को सर्जन डॉ. प्रशांत जैन एवं कैंसर विशेषज्ञ डॉ. संजय जैन तथा डॉ. अंकित जैन ने मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार खरे के निर्देशानुसार जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे के मार्गदर्शन में डॉ. हिमेश पाठक, डॉ. आशीष विवेक भारती, डॉ. हरिओम सिंह एवं डॉ. सुनीता तिवारी ने शिविर के संचालन में सहयोग किया।

जिला प्रशासन की ओर से डिप्टी कलेक्टर स्वर्णा दीवान ने शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं एवं संचालन की सतत निगरानी की। पंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से बड़ी संख्या में महिलाओं को भी शिविर में शामिल किया गया। मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए दीनदयाल रसोई में भोजन की व्यवस्था की गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार खरे ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य कैंसर के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और प्रारंभिक अवस्था में ही बीमारी की पहचान करना था। चिन्हित 83 मरीजों को शैल्बी हॉस्पिटल जबलपुर में आगे की जांच एवं उपचार के लिए बुलाया गया है। उन्होंने मरीजों से समग्र आईडी, आधार कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड साथ लेकर आने की अपील की, ताकि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र मरीजों को निःशुल्क उपचार का लाभ मिल सके।

उन्होंने महिलाओं से विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा नियमित स्वास्थ्य जांच कराने का आग्रह किया। शैल्बी हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा चिन्हित मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंसर की समय पर पहचान और उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आगामी दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे स्क्रीनिंग एवं जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे।

Share this:

जिले में वर्षा ऋतु के दौरान सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर आमजन को सर्प-दंश से बचाव, प्राथमिक सावधानियों तथा समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी ने विस्‍तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। सर्प-दंश से बचाव के लिए जिले के सभी पंचायत एवं शहरी वार्ड पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जागरूकता कार्यक्रम के तहत होर्डिंग, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया तथा एफएम रेडियो के माध्यम से जिंगल्स प्रसारित कर लोगों को सर्प-दंश से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी। स्कूल, कॉलेज, चौपाल और स्थानीय कार्यक्रमों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके लिए आम नागरिकों को विशेष रूप से झाड़-फूंक में समय न गंवाने और सर्प-दंश के बाद गोल्‍डन हावर में सीधे अस्पताल पहुंचने के लिए जागरूक किया जाएगा। प्रदेश में सर्प-दंश से होने वाली जनहानि को देखते हुए म.प्र. राज्‍य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भोपाल द्वारा सर्पदंश को स्थानीय आपदा घोषित किया गया है। प्रदेश में पिछले वर्ष सर्प-दंश से 2,500 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी। सर्प मित्रों और रेस्क्यू टीम को दिया जाएगा प्रशिक्षणस्‍नैक केचर्स, सर्प मित्र, होमगार्ड, एसडीईआरएफ एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक एवं उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित सर्प मित्रों का डेटाबेस तैयार कर उनकी जानकारी पंचायत एवं वार्ड स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर नागरिक इनसे संपर्क कर सकेंगे। सर्प मित्रों को सुरक्षित रेस्क्यू के लिए स्‍नेक रेस्‍क्‍यू किट तथा फर्स्‍ट एड किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। अस्पतालों में एंटी-वीनोम का पर्याप्त भंडारणकलेक्‍टर श्री तिवारी ने सर्प-दंश पीड़ितों के त्वरित उपचार के लिए शासकीय चिकित्सालयों में आवश्यक उपकरण, दवाएं एवं एंटी-वीनोम का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में सर्प-दंश के मामलों में तत्काल उपचार की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। खेतों और जंगलों में कार्य करते समय बरतें सावधानीसर्प-दंश की घटनाओं को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया गया है। खेतों एवं जंगलों में कार्य करने वाले लोगों को लंबे जूते और मोटे दस्ताने पहनने की सलाह दी गई है। पशुओं के बाड़ों में पर्याप्त रोशनी तथा जाली/बैरियर की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पर्यटन स्थलों एवं सर्प-प्रवण क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड तथा स्‍नैक आईडेंटिटीफिकेशन बैनर लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को संभावित खतरे की जानकारी मिल सके। जिला स्तर पर तैयार होगा सर्प-दंश का डाटाबेसकलेक्टर श्री तिवारी के निर्देश पर सर्प-दंश की घटनाओं का जिला स्तरीय डाटाबेस तैयार किया जाएगा। डिस्‍ट्रीक्‍ट डिजास्‍टर मैनेजमेंट प्‍लान में सर्प-दंश को रिस्‍क एनालिसिस एवं एसओपी में शामिल किया जाएगा। साथ ही जीआईएस मानचित्र के माध्यम से सर्प-दंश की घटनाओं तथा संबंधित प्रजातियों का वर्गीकरण और डाटाबेस तैयार करने की व्यवस्था की जाएगी। सर्प-दंश से बचाव के लिए नागरिक अपनाएं ये सावधानियां सर्प-दंश से बचाव के लिए नागरिको को सलाह दी गई है कि वे जूते, कपड़े और स्लीपिंग बैग का उपयोग करने से पहले अच्छी तरह झाड़ लें। इसी प्रकार रात में, बारिश के बाद तथा झाड़ियों या पेड़ों के आसपास जाते समय टॉर्च और छड़ी का उपयोग करें। वहीं जमीन पर सोने के बजाय पलंग/खाट एवं मच्छरदानी का प्रयोग करें। इसी प्रकार सांप को छेड़ें नहीं, उस पर हमला न करें और न ही उसे पकड़ने का प्रयास करें। जबकि घर के आसपास घास, कबाड़, गड्ढे और कचरा जमा न होने दें। इसके अलावा पानी का मटका जमीन से ऊपर स्टैंड पर रखें। सर्प-दंश के संभावित लक्षणसर्प-दंश के बाद काटने वाली जगह पर दर्द, सूजन, लालिमा अथवा नीला पड़ना और दांत के निशान दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा उल्टी, जी मिचलाना, अकड़न, कंपकंपी, पसीना, लो ब्लड प्रेशर, पेट दर्द, दस्त, कमजोरी एवं अत्यधिक प्यास जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। गंभीर विषैले सर्प के दंश में आंखें खोलने या बोलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी तथा अन्य गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना समय गंवाए तत्काल अस्पताल पहुंचना आवश्यक है। सर्प-दंश के बाद क्या करें?प्रशासन द्वारा नागरिको को सलाह दी गई है कि सर्प-दंश होने पर शांत रहें और मरीज को आराम दें तथा प्रभावित अंग को स्थिर रखें। मरीज को जल्द से जल्द निकटतम अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। इसके अलावा घाव को साफ एवं खुला रखें। जबकि ढीली पट्टी बांधी जा सकती है, लेकिन रक्त प्रवाह को पूरी तरह बाधित न करें। सांप का रंग और आकार याद रखने का प्रयास करें, लेकिन सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश बिल्कुल न करें। सर्प-दंश के बाद ये काम बिल्कुल न करेंसर्पदंश के बाद घाव को काटें या विष चूसने का प्रयास न करें। इसी प्रकार आइस पैक न लगाएं। घाव पर साबुन या रसायन न लगाएं। जबकि मरीज को अल्कोहल या कैफीन का सेवन न कराएं। वहीं स्वयं से कोई दवा या मरहम न दें। इसी प्रकार सपेरे, तांत्रिक अथवा झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद न करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें

जिले में वर्षा ऋतु के दौरान सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर आमजन को सर्प-दंश से बचाव, प्राथमिक सावधानियों तथा समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी ने विस्‍तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। सर्प-दंश से बचाव के लिए जिले के सभी पंचायत एवं शहरी वार्ड पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जागरूकता कार्यक्रम के तहत होर्डिंग, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया तथा एफएम रेडियो के माध्यम से जिंगल्स प्रसारित कर लोगों को सर्प-दंश से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी। स्कूल, कॉलेज, चौपाल और स्थानीय कार्यक्रमों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके लिए आम नागरिकों को विशेष रूप से झाड़-फूंक में समय न गंवाने और सर्प-दंश के बाद गोल्‍डन हावर में सीधे अस्पताल पहुंचने के लिए जागरूक किया जाएगा। प्रदेश में सर्प-दंश से होने वाली जनहानि को देखते हुए म.प्र. राज्‍य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भोपाल द्वारा सर्पदंश को स्थानीय आपदा घोषित किया गया है। प्रदेश में पिछले वर्ष सर्प-दंश से 2,500 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी। सर्प मित्रों और रेस्क्यू टीम को दिया जाएगा प्रशिक्षणस्‍नैक केचर्स, सर्प मित्र, होमगार्ड, एसडीईआरएफ एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक एवं उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित सर्प मित्रों का डेटाबेस तैयार कर उनकी जानकारी पंचायत एवं वार्ड स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर नागरिक इनसे संपर्क कर सकेंगे। सर्प मित्रों को सुरक्षित रेस्क्यू के लिए स्‍नेक रेस्‍क्‍यू किट तथा फर्स्‍ट एड किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। अस्पतालों में एंटी-वीनोम का पर्याप्त भंडारणकलेक्‍टर श्री तिवारी ने सर्प-दंश पीड़ितों के त्वरित उपचार के लिए शासकीय चिकित्सालयों में आवश्यक उपकरण, दवाएं एवं एंटी-वीनोम का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में सर्प-दंश के मामलों में तत्काल उपचार की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। खेतों और जंगलों में कार्य करते समय बरतें सावधानीसर्प-दंश की घटनाओं को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया गया है। खेतों एवं जंगलों में कार्य करने वाले लोगों को लंबे जूते और मोटे दस्ताने पहनने की सलाह दी गई है। पशुओं के बाड़ों में पर्याप्त रोशनी तथा जाली/बैरियर की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पर्यटन स्थलों एवं सर्प-प्रवण क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड तथा स्‍नैक आईडेंटिटीफिकेशन बैनर लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को संभावित खतरे की जानकारी मिल सके। जिला स्तर पर तैयार होगा सर्प-दंश का डाटाबेसकलेक्टर श्री तिवारी के निर्देश पर सर्प-दंश की घटनाओं का जिला स्तरीय डाटाबेस तैयार किया जाएगा। डिस्‍ट्रीक्‍ट डिजास्‍टर मैनेजमेंट प्‍लान में सर्प-दंश को रिस्‍क एनालिसिस एवं एसओपी में शामिल किया जाएगा। साथ ही जीआईएस मानचित्र के माध्यम से सर्प-दंश की घटनाओं तथा संबंधित प्रजातियों का वर्गीकरण और डाटाबेस तैयार करने की व्यवस्था की जाएगी। सर्प-दंश से बचाव के लिए नागरिक अपनाएं ये सावधानियां सर्प-दंश से बचाव के लिए नागरिको को सलाह दी गई है कि वे जूते, कपड़े और स्लीपिंग बैग का उपयोग करने से पहले अच्छी तरह झाड़ लें। इसी प्रकार रात में, बारिश के बाद तथा झाड़ियों या पेड़ों के आसपास जाते समय टॉर्च और छड़ी का उपयोग करें। वहीं जमीन पर सोने के बजाय पलंग/खाट एवं मच्छरदानी का प्रयोग करें। इसी प्रकार सांप को छेड़ें नहीं, उस पर हमला न करें और न ही उसे पकड़ने का प्रयास करें। जबकि घर के आसपास घास, कबाड़, गड्ढे और कचरा जमा न होने दें। इसके अलावा पानी का मटका जमीन से ऊपर स्टैंड पर रखें। सर्प-दंश के संभावित लक्षणसर्प-दंश के बाद काटने वाली जगह पर दर्द, सूजन, लालिमा अथवा नीला पड़ना और दांत के निशान दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा उल्टी, जी मिचलाना, अकड़न, कंपकंपी, पसीना, लो ब्लड प्रेशर, पेट दर्द, दस्त, कमजोरी एवं अत्यधिक प्यास जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। गंभीर विषैले सर्प के दंश में आंखें खोलने या बोलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी तथा अन्य गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना समय गंवाए तत्काल अस्पताल पहुंचना आवश्यक है। सर्प-दंश के बाद क्या करें?प्रशासन द्वारा नागरिको को सलाह दी गई है कि सर्प-दंश होने पर शांत रहें और मरीज को आराम दें तथा प्रभावित अंग को स्थिर रखें। मरीज को जल्द से जल्द निकटतम अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। इसके अलावा घाव को साफ एवं खुला रखें। जबकि ढीली पट्टी बांधी जा सकती है, लेकिन रक्त प्रवाह को पूरी तरह बाधित न करें। सांप का रंग और आकार याद रखने का प्रयास करें, लेकिन सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश बिल्कुल न करें। सर्प-दंश के बाद ये काम बिल्कुल न करेंसर्पदंश के बाद घाव को काटें या विष चूसने का प्रयास न करें। इसी प्रकार आइस पैक न लगाएं। घाव पर साबुन या रसायन न लगाएं। जबकि मरीज को अल्कोहल या कैफीन का सेवन न कराएं। वहीं स्वयं से कोई दवा या मरहम न दें। इसी प्रकार सपेरे, तांत्रिक अथवा झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद न करें।