एक साल से मजदूरी के लिए भटक रहा निगेहरा का पीड़ित मजदूर, कलेक्टर से शिकायत के बाद भी नहीं मिला भुगतान
अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए दफ्तरों के चक्कर; मजदूर का आरोप मजदूरी मांगने पर मिलता है कथित तौर पर अभद्र जवाब
विजयराघवगढ़। RPKP INDIA NEWS
एक गरीब मजदूर ने करीब एक साल तक मेहनत कर सरकारी विभाग से जुड़े काम को पूरा किया, लेकिन जब मेहनत की मजदूरी मांगने की बारी आई तो उसे कथित तौर पर भुगतान के बजाय टालमटोल और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। अपनी बकाया मजदूरी के लिए मजदूर अब प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है। गंभीर बात यह है कि पीड़ित द्वारा पूर्व में भी कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत किए जाने के बावजूद उसे अब तक राहत नहीं मिल सकी है।
मामला विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्राम निगहरा निवासी भगवतदीन बर्मन से जुड़ा है। पीड़ित मजदूर ने कलेक्टर कटनी को दी शिकायत में बताया है कि वह पीएचई विभाग, विजयराघवगढ़ में पवनसुत कॉन्ट्रेक्टर के अधीन हैंडपंप सुधारने का कार्य करता है। आरोप है कि पिछले करीब एक वर्ष से उसके द्वारा किए गए कार्य की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
मजदूरी मांगने पर कथित तौर पर मिलता है दो टूक जवाब
पीड़ित के अनुसार, जब वह अपनी मेहनत की मजदूरी मांगने ठेकेदार के पास जाता है तो कथित तौर पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। शिकायत में मजदूर ने आरोप लगाया है कि उसे यह तक कहा जाता है कि “जब मुझे समय मिलेगा तब देखूंगा, जहां-जहां शिकायत करना है कर दो, मेरा कुछ नहीं होगा।”
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं तो सवाल यह है कि आखिर एक गरीब मजदूर अपनी मेहनत की कमाई लेने के लिए किस दरवाजे पर दस्तक दे 17 मार्च की शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत भगवतदीन बर्मन का कहना है कि उसने इस मामले को लेकर 17 मार्च 2026 को भी कलेक्टर कार्यालय में शिकायत प्रस्तुत की थी, लेकिन शिकायत के बाद भी अब तक मजदूरी भुगतान को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि ठेकेदार द्वारा कथित तौर पर उसे यह कहकर टाल दिया जाता है कि मजदूरी का भुगतान कलेक्टर कार्यालय से ही कराया जाए, जबकि मजदूर का कहना है कि वह अपनी मजदूरी के लिए बार-बार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।
एक साल की मेहनत, लेकिन घर चलाने के लिए पैसे नहीं
गरीब परिवार से आने वाले इस मजदूर के लिए मजदूरी केवल रकम नहीं, बल्कि परिवार का चूल्हा जलाने का सहारा है। एक मजदूर यदि सालभर काम करने के बाद भी अपनी मेहनत की कमाई के लिए भटकता रहे तो उसके परिवार पर क्या गुजरती होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। मजदूर दिनभर मेहनत इसलिए करता है ताकि शाम को घर लौटकर परिवार के लिए भोजन, बच्चों की जरूरतें और रोजमर्रा का खर्च पूरा कर सके। लेकिन जब महीनों तक मेहनत का पैसा ही हाथ में न आए तो परिवार की आर्थिक स्थिति किस कदर बिगड़ती होगी, यह सवाल भी प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा है।
ठेकेदार रीवा का बताया जा रहा, प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
पीड़ित के अनुसार संबंधित ठेकेदार रीवा का बताया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले मजदूरों के भुगतान और उनके अधिकारों की निगरानी कौन कर रहा है, यह भी जांच का विषय है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन शिकायत को गंभीरता से लेकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या संबंधित विभाग से मजदूर द्वारा किए गए कार्य का रिकॉर्ड, भुगतान संबंधी दस्तावेज और ठेकेदार को किए गए भुगतान की जानकारी सामने लाई जाएगी? और यदि मजदूर की मजदूरी वास्तव में बकाया है तो उसे उसका हक कब मिलेगा?
कलेक्टर से जांच और भुगतान की मांग
भगवतदीन बर्मन ने कलेक्टर कटनी से मामले की जांच कराकर बकाया मजदूरी का भुगतान कराने तथा शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
फिलहाल पूरा मामला प्रशासन के सामने है। अब देखना होगा कि शिकायत के बाद कागजों में कार्रवाई होती है या फिर एक गरीब मजदूर को अपनी मेहनत की कमाई के लिए इसी तरह दफ्तर-दफ्तर भटकना पड़ता है।
सवाल सीधा है—जिस मजदूर ने सालभर मेहनत की, उसे उसकी मजदूरी के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा?
वही ठेकेदार से संपर्क कर जानकारी ली गई तो बताया गया कि मैं अभी बाहर हू विभाग कि ओर से मेरा खुद भुगतान नहीं हुआ है जैसे आऊंगा ,, तो मजदूर से मिलूंगा और बात करूंगा।

