बरही में शांति समिति की बैठक में उठे सवाल: त्योहारों की तैयारी से ज्यादा नगर की बदहाल सड़कों पर गुस्सा

बरही। RPKP INDIA NEWS

ईद मिलाद-उल-नबी एवं रक्षाबंधन पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से बरही थाना परिसर में पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। थाना प्रभारी अरविंद चौबे की मौजूदगी में आयोजित बैठक में दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों से त्योहारों की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और पुलिस-प्रशासन से अपेक्षाओं को लेकर चर्चा की गई। हालांकि बैठक आगे बढ़ी तो त्योहारों की तैयारियों के साथ नगर की बदहाल व्यवस्थाओं का मुद्दा भी जोरदार तरीके से सामने आया।

बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं पत्रकारों ने नगर की विभिन्न समस्याओं को लेकर पुलिस प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया। सबसे गंभीर मुद्दा नगर में संचालित शराब दुकान को लेकर सामने आया। लोगों ने कहा कि रहवासी क्षेत्र में शराब दुकान संचालित होने के कारण आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है तथा आए दिन विवाद की स्थिति निर्मित होती है। लोगों ने शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की मांग प्रशासन के सामने रखी।

छिंदिया टोला मार्ग बना मुसीबत, भारी वाहनों ने सड़क को किया तबाह

बैठक में वार्ड क्रमांक 14 एवं आसपास के क्षेत्र से जुड़ी छिंदिया टोला सड़क का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वार्ड क्रमांक 14 के निर्दलीय पार्षद संतोष द्विवेदी एवं वार्ड क्रमांक 15 के भाजपा पार्षद इकबाल पवार ने बताया कि कैमोर, विजयराघवगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में संचालित क्रेशर प्लांटों से गिट्टी लेकर निकलने वाले भारी वाहन लगातार इस मार्ग से गुजर रहे हैं। पार्षदों के मुताबिक भारी वाहनों की आवाजाही के चलते सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और बारिश के कारण सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई है। स्थिति यह है कि पैदल चलने वाले लोगों से लेकर दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों तक को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों एवं वार्डवासियों के चोटिल होने की शिकायतें भी सामने रखी गईं।

पार्षदों ने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर सड़क की मरम्मत को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वार्डवासियों के साथ महिला, पुरुष एवं स्कूली बच्चों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। पार्षदों ने कहा कि जल्द ही प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा, लेकिन यह महज ज्ञापन नहीं बल्कि आंदोलन का अल्टीमेटम होगा। सड़क की समस्या का समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी भी दी गई।

खितौली मार्ग पर भी जानलेवा गड्ढे

बैठक में खितौली मार्ग की बदहाली का मामला भी सामने आया। समाजसेवियों एवं पत्रकारों ने थाना प्रभारी को जानकारी दी कि राम मेडिकल के सामने से आगे तक सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाता और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। लोगों ने संबंधित विभाग से तत्काल गड्ढों को भरवाने और सड़क की मरम्मत कराने की मांग रखी, ताकि आगामी त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले यातायात में आम लोगों को परेशानी न हो।

त्योहारों में जाम से निपटने की मांग

आगामी त्योहारों को देखते हुए बरही के मुख्य चौराहे पर पुलिस का अतिरिक्त बल अथवा एक कर्मचारी तैनात करने की मांग भी बैठक में उठी। लोगों ने कहा कि विजयराघवगढ़, मैहर एवं कटनी मार्ग पर आए दिन जाम की स्थिति निर्मित होती है। त्योहारों के दौरान बाजार और सड़कों पर भीड़ बढ़ने के कारण समस्या और गंभीर हो सकती है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने, मुख्य चौराहे पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने तथा भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने की मांग की।

हर बार बैठक, फिर भी समस्याएं जस की तस

बैठक के दौरान एक अहम सवाल यह भी उठा कि बरही थाने में वर्षों से शांति समिति की बैठकें आयोजित होती आ रही हैं। हर बार नगर की समस्याओं को लेकर सुझाव और मांगें रखी जाती हैं, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद इन मांगों पर कितना अमल होता है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि पूर्व में आयोजित बैठकों में उठाई गई समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई होती तो आज कई समस्याएं इतनी गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचतीं। बैठक में रखी गई मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय

इस बार की शांति समिति की बैठक में नगर के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं पार्षदों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों से जुड़े जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, बावजूद इसके बैठक में गिने-चुने प्रतिनिधियों की ही उपस्थिति दिखाई दी।

नगर में यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर शांति समिति की बैठकों में जनप्रतिनिधियों की सहभागिता लगातार क्यों कम होती जा रही है क्या पूर्व बैठकों में उठाई गई मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण जनप्रतिनिधियों का भरोसा कम हुआ है, या फिर बैठकों को महज औपचारिकता मान लिया गया है? यह स्थिति प्रशासन के लिए भी गंभीर संकेत मानी जा रही है। शांति समिति की बैठक केवल त्योहारों के दौरान औपचारिक चर्चा तक सीमित न रहकर नगर की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बने, यही लोगों की अपेक्षा है।

अब देखना यह होगा कि बैठक में उठे मुद्दों पर पुलिस एवं प्रशासन कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या त्योहारों से पहले बरही की जर्जर सड़कों, यातायात व्यवस्था, शराब दुकान एवं अन्य समस्याओं को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर इस बार की बैठक भी पूर्व बैठकों की तरह कागजों और आश्वासनों तक सीमित रह जाती है।

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