आरटीआई में जानकारी देने से कतरा रहा नगर परिषद? विजयराघवगढ़ नगर परिषद में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को लेकर उठे सवाल

विजयराघवगढ़। RPKP INDIA NEWS

नगर परिषद विजयराघवगढ़ में कथित भ्रष्टाचार और शासकीय योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में नगर परिषद के अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं। इससे परिषद के कार्यों और शासकीय राशि के व्यय को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायतकर्ता एवं पत्रकार सुरेन्द्र दुबे का आरोप है कि बीते एक वर्ष के दौरान नगर परिषद में विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं विकास कार्यों पर खर्च की गई राशि का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उनका कहना है कि आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी के बावजूद अधिकारियों द्वारा जानकारी देने से बचने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर परिषद में एक ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा दो नगर परिषदों का वित्तीय प्रभार संभाला जा रहा है। इसके चलते प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों के बजट पर सवाल

शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर की मूलभूत सुविधाओं की अपेक्षा स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों पर बड़े पैमाने पर राशि खर्च की जा रही है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेकेदारों को किए गए भुगतान तथा बिलों के संबंध में भी जांच की मांग उठाई गई है।

हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि आरोप सही हैं तो संबंधित निर्माण कार्यों, भुगतान अभिलेखों, बिल-वाउचर तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

आरटीआई जानकारी से खुलेगा वित्तीय रिकॉर्ड का सच

आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी यदि निर्धारित नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाती है तो नगर परिषद की विभिन्न योजनाओं में स्वीकृत राशि, वास्तविक व्यय, भुगतान किए गए बिल और संबंधित कार्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अब सवाल यह है कि यदि नगर परिषद के सभी कार्य और वित्तीय भुगतान नियमानुसार हैं, तो मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने में परेशानी क्यों हो रही है? वहीं, यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी उठ सकती है।

मामले में संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड की जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई किए जाने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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