मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था बदहाल, युवाओं का भविष्य संकट में: मुकेश नायक

श्री मुकेश नायक का आह्वान: 19 सितंबर को इंदौर में गूंजेगी छात्रों की आवाज़, “छात्रों की गूँज” में युवा हों शामिल

भोपाल। RPKP INDIA NEWS
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों, खेलकूद तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

इस अवसर पर पूर्व प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा, विक्रम चौधरी, राहुल राज, अपराजिता पांडे और अभिनव बरोलिया सहित कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

श्री नायक ने कहा कि मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षाएं और समय पर परीक्षाएं नहीं हो रही हैं, छात्रों को वर्षों तक डिग्रियां नहीं मिल रही हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुकेश नायक ने कहा कि प्रदेश के 7,217 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में लगभग 65 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की भारी कमी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पन्ना जिले के पवई ब्लॉक के मोहंदरा शासकीय कन्या विद्यालय में बीए और एमए राजनीति शास्त्र के शिक्षक 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को भौतिकी पढ़ाते पाए गए, वह भी बाजार से खरीदी गई गाइड देखकर।

उन्होंने कहा कि यह केवल एक स्कूल की समस्या नहीं है, बल्कि प्रदेश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है।

मुकेश नायक ने कहा कि प्रदेश में 463 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी बच्चे ने प्रवेश नहीं लिया। वहीं मिड-डे मील और पोषण आहार में अनियमितताओं के कारण प्राथमिक स्तर के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का शिक्षा बजट कुल बजट का मात्र 13.7 प्रतिशत है, जो शिक्षा के प्रति सरकार की प्राथमिकता को स्पष्ट करता है।

मुकेश नायक ने कहा कि मध्य प्रदेश में 54 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं, लेकिन इनके नियमन और गुणवत्ता की स्थिति पर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नियामक संस्थाएं वास्तविक भौतिक सत्यापन के बजाय फाइलों के आधार पर नए विश्वविद्यालयों को मंजूरी दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि कई विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षाएं नहीं लगतीं और परीक्षाओं का भी कोई निश्चित समय नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों, विशेषकर दिल्ली, हरियाणा, बिहार, झारखंड आदि से एजेंटों के माध्यम से विद्यार्थियों को लाकर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।

मुकेश नायक ने कहा कि परीक्षा परिणामों के टेबुलेशन में पारदर्शिता का अभाव है। परीक्षा के छह महीने से एक साल तक परिणाम घोषित नहीं होते और विद्यार्थियों को चार-चार साल तक डिग्री नहीं मिलती। इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है और कई विद्यार्थी नौकरी के लिए आवेदन करने की निर्धारित उम्र से बाहर हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोइन्फर्मेटिक्स, इंटरनेट माइनिंग और इंटरनेशनल टूरिज्म जैसे आधुनिक क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है, लेकिन प्रदेश के विश्वविद्यालयों में इन क्षेत्रों से जुड़े आधुनिक और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों का पर्याप्त विकास नहीं दिखाई देता।

श्री मुकेश नायक ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में न तो व्यवस्थित अकादमिक कैलेंडर है और न ही प्रभावी खेल एवं सांस्कृतिक कैलेंडर।

उन्होंने आरोप लगाया कि खेल और रेड क्रॉस के नाम पर विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस के उपयोग को लेकर भी सवाल हैं। कई जगह छात्रों के हित में उपयोग होने वाले धन का इस्तेमाल अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा एसी, पर्दे और अन्य सुविधाओं पर किए जाने की शिकायतें हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को खेल किट, ब्लेजर और यात्रा जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए भी पर्याप्त सहायता नहीं मिलती।

जिलों में उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए बनाए गए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की स्थिति पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के कारण खिलाड़ी वहां जाने से डरते हैं।

कांग्रेस नेता स्वतंत्र सिंह चौहान ने प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि व्यापमं का परीक्षा कैलेंडर समय पर लागू नहीं होता। दो लाख विद्यार्थियों की ऑनलाइन परीक्षा भी एक साथ आयोजित करने के बजाय कई दिनों और अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिफ्टों के अंतर को दूर करने के नाम पर अपनाई जाने वाली नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया विद्यार्थियों के लिए स्पष्ट नहीं है। इससे परीक्षा परिणामों और अंकों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि MPPSC जैसी संवैधानिक संस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले वर्षों में प्रारंभिक परीक्षाओं के प्रश्नों में बार-बार गलतियों और विवादों की स्थिति सामने आई है।

उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में केवल शिक्षकों के ही लगभग एक लाख पद खाली हैं। इसके अलावा सरकारी कार्यालयों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिसके कारण सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

स्वतंत्र सिंह चौहान ने कहा कि पहले विद्यार्थी मामूली शुल्क देकर अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देख सकते थे, लेकिन अब 2019 से मुख्य परीक्षा की कॉपियां दिखाने की व्यवस्था बंद है। वहीं प्रारंभिक परीक्षा की ओएमआर शीट ऑनलाइन देखने की व्यवस्था भी पिछले दो वर्षों से बंद होने की बात कही जा रही है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। युवाओं को अपने परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया को जानने का अधिकार है।

19 सितंबर को इंदौर में उठेगी छात्रों की आवाज
मुकेश नायक ने कहा कि नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी जी के छात्र संवाद के तहत 19 सितंबर को इंदौर में आयोजित “छात्रों की गूँज” कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए विद्यार्थियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम से जुड़ें और दिए गए QR Code के माध्यम से अपना पंजीयन करें।

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें