पत्रकारिता को कारोबार नहीं, जनसेवा का माध्यम बनाइए; गरीब और दबे-कुचलों की आवाज बनें
जिसकी आवाज धन, पद और प्रभाव के बीच दब जाए, उसकी बात सामने लाना ही पत्रकारिता की असली जिम्मेदारी
बरही। RPKP INDIA NEWS। पत्रकारिता केवल खबर लिखने, कैमरे के सामने खड़े होने या किसी घटना को लोगों तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है। पत्रकारिता के साथ समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। खासकर उस व्यक्ति की आवाज उठाना, जो आर्थिक कमजोरी, सामाजिक दबाव या प्रभावशाली लोगों के सामने अपनी बात नहीं रख पाता, पत्रकारिता के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल है।
आज जरूरत इस बात पर विचार करने की है कि यदि पत्रकारिता भी केवल व्यक्तिगत लाभ का माध्यम बन जाए, तो गरीब, असहाय और जरूरतमंद व्यक्ति अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएगा। पत्रकार की कलम तब सबसे अधिक सार्थक होती है, जब वह बिना किसी भेदभाव के कमजोर व्यक्ति की समस्या को सामने लाने और उसे न्याय दिलाने की कोशिश करे।
निस्वार्थ पत्रकारिता की राह आसान नहीं
ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ पत्रकारिता करना हमेशा आसान नहीं होता। कई बार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, प्रभावशाली लोगों का दबाव झेलना पड़ सकता है और आलोचनाओं के बीच भी अपनी बात पर कायम रहना पड़ सकता है।
लेकिन यदि किसी पत्रकार की खबर या प्रयास से किसी जरूरतमंद व्यक्ति को न्याय की उम्मीद मिलती है, उसकी समस्या प्रशासन तक पहुंचती है या उसकी आवाज समाज तक पहुंचती है, तो यह पत्रकारिता की सार्थक भूमिका को दर्शाता है।
धन और पद से बड़ा है इंसान का कर्म
जीवन में धन कमाना और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना आवश्यक है, लेकिन धन और संपत्ति को जीवन का अंतिम उद्देश्य मान लेना भी उचित नहीं। समय के साथ पैसा, जमीन-जायदाद, पद और प्रभाव सभी पीछे छूट जाते हैं। अंततः व्यक्ति के व्यवहार और उसके कर्म ही उसकी वास्तविक पहचान बनते हैं।
मनुष्य का जीवन भी स्थायी नहीं है। इसलिए ज्ञान, पद और प्रभाव का उपयोग दूसरों को दबाने के बजाय समाज के कमजोर वर्ग की मदद और सकारात्मक बदलाव के लिए किया जाना चाहिए।
ज्ञान का उपयोग समाज की आवाज उठाने में हो
पत्रकारिता और लेखन का संबंध समाज को जागरूक करने से है। मां सरस्वती से प्राप्त ज्ञान और विद्या का उपयोग यदि किसी कमजोर व्यक्ति की आवाज दबाने के बजाय उसकी बात सामने रखने में किया जाए, तो ज्ञान की सार्थकता और बढ़ जाती है।
एक पत्रकार के लिए उसकी कलम सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होती है। यही कलम किसी समस्या को उजागर कर सकती है, किसी पीड़ित की आवाज प्रशासन तक पहुंचा सकती है और समाज में किसी जरूरी मुद्दे पर चर्चा शुरू कर सकती है।
जीवन की सच्चाई से सीख लेने की जरूरत
हाल ही में क्षेत्र के एक बड़े खनिज व्यापारी का निधन हुआ। उनके पास धन-संपत्ति की कमी नहीं थी, लेकिन जीवन का अंत होने के बाद सारी संपत्ति और भौतिक सुविधाएं पीछे ही रह गईं। यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि जीवन में इंसान कितना भी धन या प्रभाव अर्जित कर ले, अंतिम यात्रा में भौतिक संपत्ति साथ नहीं जाती।
इसीलिए जीवन रहते गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की मदद करना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना महत्वपूर्ण है।
कलम की ताकत कमजोर की आवाज बनने में है
पत्रकारिता को केवल कमाई का माध्यम बनाने के बजाय इसे समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। पत्रकार की भूमिका तब और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति की आवाज पैसे, पद या प्रभाव के कारण दब रही हो।
पत्रकारिता की ताकत सिर्फ खबर दिखाने में नहीं, बल्कि उस आवाज को सामने लाने में है जिसे कोई सुनना नहीं चाहता।
जब तक जीवन है, अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद, समाज की समस्याओं को सामने लाने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास किया जाना चाहिए। आखिरकार धन, पद और प्रभाव यहीं रह जाते हैं; इंसान के साथ उसकी अच्छाई, उसके कर्म और समाज के लिए किए गए कार्यों की याद ही रह जाती है।

